Vijay Diwas History: कभी भारत ने निभाया था बांग्लादेश के निर्माण में अहम रोल, आज एहसान फरामोश बना देश?

Vijay Diwas History: क्या आप जानते हैं कि आज का दिन भारत की ऐतिहासिक विजय और नए राष्ट्र बांग्लादेश के निर्माण का प्रतीक है? हर साल 16 दिसंबर को विजय दिवस (Vijay Diwas) के रूप में मनाया जाता है।

यह वह दिन है, जब भारतीय सेना ने 1971 में पाकिस्तान पर निर्णायक जीत दर्ज की थी और पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को आजादी दिलाकर एक नया देश, बांग्लादेश बनाया था। लेकिन, 2024 की वर्तमान स्थिति ही कुछ अलग है। भारत का दुश्मन बना बांग्लादेश बार-बार उन एहसानों को भूला रहा है। 15 साल तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठीं शेख हसीना ने भारत के प्रति मित्रता निभाई। लेकिन, वक्त का पहिया ऐसे घुमा की नकारात्मक आंतरिक ताकतों के चलते शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

Vijay Diwas History

बांग्लादेश पीएम पद से इस्तीफा दिया। भारत की शरण में आईं शेख हसीना के प्रति भारत ने मित्रता बखूबी निभाई। इसके चलते, बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक हस्तियों ने भारत के खिलाफ दुश्मनी के सुर गुनगुनाने शुरू कर दिए। आइए टाइम लाइन में आपको रूबरू कराते हैं बांग्लादेश के निर्माण में भारत के अहम रोल से...

1971 का युद्ध: बांग्लादेश का जन्म
1971 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़ा। यह लड़ाई पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ थी। पाकिस्तान की सेना ने जनरल याह्या खान के नेतृत्व में पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली लोगों पर भीषण दमन और नरसंहार किया था। इन अत्याचारों के खिलाफ बंगाली राष्ट्रवादियों ने आजादी की मांग उठाई।

भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के इस दमन को रोकने के लिए भारतीय सेना को हस्तक्षेप का आदेश दिया। 4 दिसंबर 1971 को भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट शुरू किया। इसके बाद भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना को हराया। अंततः, 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया, और बांग्लादेश नामक नए राष्ट्र का जन्म हुआ।

इतिहास में बांग्लादेश
आज का बांग्लादेश कभी भारत का हिस्सा था। अंग्रेजों के शासनकाल में 1905 में बंगाल का विभाजन किया गया था, लेकिन 1911 में इसे फिर से जोड़ा गया। 1947 में भारत के बंटवारे के बाद बंगाल का पूर्वी हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान बना और पश्चिमी हिस्सा भारत का हिस्सा बन गया।

पाकिस्तान के बनने के बाद भी पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच कभी तालमेल नहीं हो पाया। भाषा, संस्कृति और राजनीतिक उपेक्षा ने पूर्वी पाकिस्तान में असंतोष को बढ़ाया। 1971 का युद्ध इस असंतोष का नतीजा था।

युद्ध का असर और आत्मसमर्पण
16 दिसंबर 1971 को, ढाका में पाकिस्तानी सेना के 93,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना जाता है। इसके साथ ही, नौ महीने के मुक्ति संग्राम का अंत हुआ, और बांग्लादेश स्वतंत्र देश बना।

विजय दिवस समारोह
इस ऐतिहासिक दिन की याद में भारत और बांग्लादेश हर साल विजय दिवस मनाते हैं। इस अवसर पर दोनों देशों के पूर्व सैनिक और अधिकारी समारोह में भाग लेते हैं। 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता में भारत की मदद और दोनों देशों के साझा बलिदान को याद किया जाता है।

1971 की विजय का महत्व
1971 का युद्ध न केवल पाकिस्तान की हार थी, बल्कि यह भारत के वैश्विक कूटनीतिक और सैन्य शक्ति का भी प्रतीक बना। यह युद्ध भारत और बांग्लादेश के बीच मित्रता की एक नई शुरुआत भी थी।

टाइमलाइन में जानें सबकुछ

  • 1947-1971: पाकिस्तान दो हिस्सों में विभाजित था - पश्चिमी पाकिस्तान (आज का पाकिस्तान) और पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश)। पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली आबादी होने के बावजूद, वहां राजनीतिक और सांस्कृतिक भेदभाव चरम पर था।
  • 1970 का चुनाव: शेख मुजीबुर रहमान की पार्टी अवामी लीग ने पूर्वी पाकिस्तान में भारी जीत दर्ज की, लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान ने इसे सत्ता सौंपने से इनकार कर दिया।
  • 1971: इस भेदभाव और अत्याचार के खिलाफ बांग्लादेश मुक्ति संग्राम शुरू हुआ। पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सर्चलाइट के तहत अत्याचार किए, जिसमें लाखों लोग मारे गए और लाखों ने भारत में शरण ली।
  • 3 दिसंबर 1971: पाकिस्तान ने भारत पर हवाई हमला किया, जिसमें भारतीय वायुसेना के 11 ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया।
  • पूर्वी मोर्चा: भारतीय सेना ने मुक्ति बाहिनी (बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानियों) के साथ मिलकर तेजी से पूर्वी पाकिस्तान के प्रमुख ठिकानों जैसे जेसोर और खुलना पर कब्जा किया।
  • 14 दिसंबर: भारतीय वायुसेना ने ढाका के गवर्नमेंट हाउस पर बमबारी की, जिससे वहां बैठे पाकिस्तानी अधिकारी भयभीत हो गए। गवर्नर मलिक ने इस्तीफा दे दिया।
  • 16 दिसंबर 1971: भारतीय सेना ने ढाका पर कब्जा कर लिया। भारतीय जनरल जेएफआर जैकब और लेफ्टिनेंट जनरल एए खान नियाज़ी के बीच आत्मसमर्पण की शर्तें तय हुईं।
  • पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। यह अब तक का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण है।

ये भी पढ़ें- बांग्लादेश में हिंदू हिंसा के खिलाफ अमेरिका में उठने लगी आवाज, कांग्रेस सेनेटर ने उठाई मांग

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+