Video: चीन बॉर्डर पर लगातार गश्त कर रहा बालाकोट एयरस्ट्राइक करने वाला IAF का फाइटर जेट मिराज
लेह। 15 जून को भारत और चीन की सेनाओं के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) की स्थितियां पूरी तरह से बदल गई हैं। अब एक नया वीडियो सामने आया है और इस वीडियो में लद्दाख के लेह एयरबेस से इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के फाइटर जेट्स को लगातार उड़ान भरते हुए देखा जा सकता है।

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लगातार उड़ान भर रहे हैं मिराज और सुखोई
न्यूज एजेंसी एएनआई की ओर से बताया गया है कि क्षेत्र में चीन के साथ जारी टकराव के दौरान ही आईएएफ की गतिविधियों में तेजी आई है। सुखोई और मिराज-2000 जैसे फाइटर जेट्स लगातार गश्त लगा रहे हैं। भारत और चीन के बीच 15/16 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर स्थितियां बदलती हुई नजर आ रही हैं। सूत्रों की तरफ से बताया गया है कि भारत ने अब चीन को जवाब देने के लिए नियमों में बदलाव किया है। भारत की तरफ से एलएसी पर लगातार जवानों की तैनाती को बढ़ाया जा रहा है। वहीं फाइटर जेट्स भी तैनात कर दिए गए हैं। चीन की तरफ से भी एलएसी पर फाइटर जेट्स और बॉम्बर्स की संख्या को बढ़ा दिया गया है। चीनी फाइटर जेट्स लगातार एलएसी पर गश्त लगा रहे हैं। पैंगोंग त्सो के उत्तरी हिस्से पर स्थित फिंगर 4 पर भारतीय जवानों को गश्त करने से रोकने के लिए चीनी जेट्स इसकी पूर्वी दिशा से टेक ऑफ कर रहे हैं। लद्दाख में जो एलएसी है वह करीब 826 किलोमीटर लंबी है।
अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर भी हुए तैनात
पैंगोंग त्सो में पीएलए गैर-कानूनी तौर पर एलएसी को बदलने की कोशिशें कर रहा है। भारत की तरफ से देपसांग, मुरगो, गलवान, हॉट स्प्रिंग्स, कोयूल, फुकशे और डेमचोक में तैनाती को बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा अपाचे हेलीकॉप्टर्स, सुखोई फाइटर जेट्स और टैंक्स को भी एलएसी पर तैनात किया गया है। इंडियन आर्मी चीन के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सेना की एक डिविजन को दो हफ्तों के बाद 14,000 फीट की ऊंचाई पर तैनात कर दिया गया है। अब सेना की तीन डिविजन तैनात हैं और चीन के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह से रेडी हैं। टॉप सूत्रों की मानें तो गलवान की घटना के बाद भारतीय जवान अब उस नियम से बंधे नहीं हैं जिसमें कहा गया है कि टकराव के समय वो हथियार का प्रयोग नहीं कर सकते हैं। सूत्रों की तरफ से बताया गया है कि एलएसी की रक्षा के लिए सरकार बहुत ही कड़े कदम उठा रही है।












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