नागर शैली में बनेगा भव्य राम मंदिर, VHP की होगी अहम भूमिका

लखनऊ। दशकों से अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को आखिरकार हमेशा के लिए खत्म कर दिया। कोर्ट ने विवादित स्थल मंदिर निर्माण के लिए देने को कहा है, साथ ही मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन अयोध्या में किसी अहम जगह पर देने का आदेश दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद अब इस बात की चर्चा हो रही है कि अयोध्या में बनने वाला मंदिर कैसा होगा, इसे किस शैली में बनाया जाएगा और यह कितना भव्य होगा। मंदिर के निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद और राम जन्मभूमि न्यास के पास पहले से इसका ब्लूप्रिंट तैयार है और उन्होंने कई वर्ष पहले मंदिर के स्वरूप को तैयार कर लिया था, ऐसे में अब उन्हें उम्मीद है कि मंदिर इसी ब्लूप्रिंट के आधार पर बनाया जाएगा।

पत्थर के शिलापट से बनेगा मंदिर

पत्थर के शिलापट से बनेगा मंदिर

वीएचपी के क्षेत्रीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि यह मंदिर दो मंजिला, 270 फीट लंबा और 135 फीट चौड़ा होगा और इसे नागरा शैली में बनाया जाएगा जोकि उत्तर भारत की काफी लोकप्रिय निर्माण शैली है। मंदिर के डिजाइन को इस तरह से तैयार किया गया है कि इसे पत्थर के टुकड़ों को जोड़-जोड़कर तैयार किया जाएगा और इसमे सीमेंट व लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। 125 फीट उंचे मंदिर में 105 खंभे होंगे। बता दें कि राम मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के भीतर ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया है।

प्रस्तावित मंदिर होगा काफी भव्य

प्रस्तावित मंदिर होगा काफी भव्य

इससे पहले श्री राम जन्मभूमि न्यास कार्यशाला के इंचार्ज अन्नू भाई सोमपुरा ने कहा था कि मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर 16.5 फीट के खंभे होंगे, जबकि दूसरी मंजिल पर 14.5 फीट के खंभे होंगे। इसमे भव्य शिखर होगा, जोकि नागरा शैली का होगा। बता दें कि सोमपुरा पिछले 20 वर्षों से इस कार्यशाला की देखरेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर की दीवारें पत्थर के शिलापट से बनेगी जोकि 6 फीट चौड़ी होगी। मंदिर की प्रतिकृती दक्षिण भारत से बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हमेशा से ही उत्सुकता का केंद्र रहा है।

मंदिर के निर्माण में वीएचपी की होगी अहम भूमिका

मंदिर के निर्माण में वीएचपी की होगी अहम भूमिका

वीएचपी के सदस्य हजारी प्रसाद जोकि कारसेवकपुरम में राम मंदिर की प्रतिकृति और मंदिर आंदोलन से जुड़े साहित्य की देखरेख करते हैं उन्होंने बताया कि मंदिर में छह द्वार होंगे। इसमे सिंघ द्वार, नृत्य मंडप, मंडप, रंग मंडप, पूजा कमरा, गर्भ गृह होगा, जिसकी श्रद्धालु परिक्रमा करेंगे। भगवान राम की मूर्ति को मंदिर के ग्राउंड फ्लोर में रखा जाएगा। मंदिर के निर्माण में 1.75 लख घन फीट बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा। मंदिर का 65 फीसदी पत्थरों की कटाई का काम पूरा हो चुका है। इन सभी पत्थरों को राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से मंगाया गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर की डिजाइन का पूरा श्रेय पूर्व वीएचपी नेता अशोक सिंघल को जाता है। वो ही चंद्रकांत सोमपुरा को 1989 में यहां लेकर आए थे और उनसे प्रस्तावित मंदिर के डिजाइन को तैयार करने को कहा था। चंद्रकांत सोमपुरा अहमदाबाद गुजरात के इस मंदिर के आर्किटेक्ट हैं।

मंदिर के आर्किटेक्ट बोले मेरे अंदर नई ऊर्जा

मंदिर के आर्किटेक्ट बोले मेरे अंदर नई ऊर्जा

वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चंद्रकांत सोमपुरा ने कहा कि कोर्ट के फैसले से उनके भीतर नई ऊर्जा आ गई है। सोमपुरा ने कहा कि मंदिर निर्माण शुरू होने में अभी छह महीने का समय और लग सकता है, एक बार जब इसका काम शुरू होगा तो दो वर्ष में इसका काम पूरा हो जाएगा। बता दें कि चंद्रकांत के पिता प्रभाकर सोमपुरा ने सोमनाथ मंदिर और मथुरा में भगवान कृष्ण के भव्य मंदिर का डिजाइन तैयार किया था। जबकि चंद्रकांत अबतक 100 से अधिक मंदिरों का डिजाइन कर चुके हैं। जिसमे गांधी नंगर का स्वामी नारायण मंदिर, पालनपुर का अंबाजी मंदिर भी शामिल है। चंद्रकांत सोमपुरा के बेटे आशीष सोमपुरा ने बताया कि यह प्रस्तावित मंदिर देश के भव्य मंदिरों में से एक होगा। सोमपुरा ने बताया कि मंदिर में राम लला का घर होगा, जबकि दूसरी मंजिल पर राम दरबार बनेगा, जिसमे भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्ति होगी।

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