राम मंदिर मामले की सुनवाई जनवरी तक टलने पर क्या बोले आरएसएस और विहिप
राम मंदिर मामले की सुनवाई टलने पर क्या बोले आरएसएस, विहिप
नई
दिल्ली। विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने सोमवार को केंद्र सरकार से कानून लाकर अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने की मांग की है। दोनों ही संगठनों की ओर से कहा गया है कि मंदिर के लिए और इंतजार नहीं किया जा सकता, इसलिए सरकार मामले को सुप्रीम कोर्ट पर ना डाले। आरएसएस की ओर से मुंबई में अखिल भारतीय कार्यकारी के तीन दिन के सम्मेलन के समापन दौरान तो वहीं विहिप ने सुप्रीम कोर्ट के मामले पर सुनवाई टालने के बाद स्टेटमेंट जारी कर ये बात कही गई है। id="toptextpromo"> id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'>
कानून लाकर बनाया जाए मंदिर: आरएसएस
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने सोमवार को कहा है कि सरकार कानून लाए और राम मंदिर के बनने का रास्ता साफ करे। कुमार ने कहा, अगर सुप्रीम कोर्ट कुछ नहीं कर पा रहा तो सरकार को ही मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ की ओर से कई मौकों पर बहुत साफगोई के साथ कह चुका है कि मंदिर निर्माण को अब और ना टाला जाए।

अनंतकाल तक मंदिर का इंतजार नहीं कर सकते: विहिप
विश्व हिन्दू परिषद ने सोमवार को कहा है कि वह राम मंदिर के निर्माण के लिए अदालत के भरोसे बैठकर अनंतकाल तक इसका इंतजार नहीं किया जा सकता। विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने मांग की है कि मोदी सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में ही कानून लाए और मंदिर बनने का रास्ता साफ करे। आलोक कुमार ने कहा, उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर मामले की सुनवाई को आगे बढ़ा दिया है । ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राम मंदिर के निर्माण के लिये अनंत काल तक इंतजार किया जाएगा।

जनवरी तक के लिए टली सुनवाई
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जनवरी तक के लिए टाल दी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले की सुनवाई जनवरी में शुरू की जाएगी। मामले की नियमित सुनवाई पर फैसला भी जनवरी में ही होगा। अदालत ने इसके लिए कोई तारीख तय नहीं की है, सिर्फ जनवरी माह में सुनवाई की बात कही है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने की। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि उचित पीठ अगले साल जनवरी में सुनवाई की आगे की तारीख तय करेगी।












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