प्रख्यात अभिनेता गिरीश कर्नाड का लंबी बीमारी के बाद निधन, फिल्म जगत में शोक की लहर
बेंगलुरू। एक दुखद खबर फिल्म जगत से है, मशहूर फिल्म अभिनेता गिरीश कर्नाड का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है, वह 81 साल के थे और पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे और उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनके निधन के बाद कर्नाटक की सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है, गिरीश कर्नाड ने फिल्मों में एक्टिंग के अलावा नाटक, स्क्रिप्ट राइटिंग और निर्देशन में अपना अधिकतर जीवन लगाया, उन्होंने फिल्म, थिएटर, टीवी हर जगह काम किया। उनका जाना फिल्म जगत के लिए बहुत बड़ा आघात है।

फिल्म 'भूमिका' के लिए नेशनल अवॉर्ड जीता था
गिरीश कर्नाड को 1978 में आई फिल्म 'भूमिका' के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था, उन्हें 1998 में साहित्य के प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ अवॉर्ड से नवाजा गया था, गिरीश कर्नाड ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने कर्मशिल सिनेमा के साथ समानांतर सिनेमा के लिए भी जमकर काम किया, अगर उन्होंने आर्ट फिल्मों में अपने अभिनय से लोगों को चौंकाया था तो वहीं उन्होंने कमर्शियल सिनेमा में अपनी एक्टिंग से लोगों से गुदगुदाया भी है।
कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा दोनों भाषाओं में चलती थी इनकी कलम
गिरीश कर्नाड ने कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा दोनों में इनकी लेखनी समानाधिकार से चलती थी। 1998 में ज्ञानपीठ सहित पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों के विजेता गिरीश द्वारा रचित तुगलक, हयवदन, तलेदंड, नागमंडल व ययाति जैसे नाटक अत्यंत लोकप्रिय हुए थे और जिनका भारत की अनेकों भाषाओं में इनका अनुवाद व मंचन हुआ था। प्रमुख भारतीय निर्देशकों - इब्राहिम अलकाजी, प्रसन्ना, अरविन्द गौड़ और बी.वी. कारंत ने इनका अलग- अलग तरीके से प्रभावी व यादगार निर्देशन किया हैं।
'एक था टाइगर' और 'टाइगर जिंदा है' में सलमान खान संग दिखे गिरीश
गिरीश ने कन्नड़ फिल्म संस्कार(1970) से अपना एक्टिंग और स्क्रीन राइटिंग डेब्यू किया था, इस फिल्म ने कन्नड़ सिनेमा का पहले प्रेजिडेंट गोल्डन लोटस अवार्ड जीता था, बॉलीवुड में उनकी पहली फिल्म 1974 में आयी 'जादू का शंख' थी, गिरीश कर्नाड को सलमान खान की फिल्म 'एक था टाइगर' और 'टाइगर जिंदा है' के लिए जाना जाता है। उनके जाने से आज फिल्मी कैनवस सूना हो गया है, जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है।












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