एमपी गजब है: सब्जी बेचने वाले और मजदूर फर्जी थाना चलाकर कर रहे थे उगाही

नई दिल्ली- मध्य प्रदेश का ग्वालियर-चंबल इलाका हमेशा से बंदूकों और डकैतों के लिए कुख्यात रहा है। लेकिन, अबकी बार इस इलाके का नाम फर्जी थाने और उसमें तैनात फर्जी पुलिस वालों के लिए चर्चित हुआ है। पुलिस को अपनी विभागीय जांच में इस फर्जी पुलिस रैकेट का पता चल गया था, लेकिन वह महीनों से इस रिपोर्ट को दबाए बैठी थी। जब व्यापम घोटाले को सामने लाने वाले शख्स को यह रिपोर्ट मिली है, तब यह बात मीडिया के सामने आई है। दिलचस्प बात ये है कि इस फर्जी थाने को जो नकली पुलिस वाले चला रहे थे, उनमें से कोई सब्ची बेचता था तो कोई दिन में दिहाड़ी मजदूरी करके रात में ट्रक वालों से पैसे वसूलने में जुट जाता था।

फर्जी थाने से फर्जी पुलिस वाले कर रहे थे उगाही

फर्जी थाने से फर्जी पुलिस वाले कर रहे थे उगाही

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ऐसे फर्जी थाने का खुलासा हुआ है, जिसमें सब्जी बेचने वाले, छोटे-मोटे पेंटर और दिहाड़ी मजदूर पुलिस की वर्दी पहनकर स्थानीय लोगों और ट्रक वालों से उगाही कर रहे थे। पुलिस की एक जांच में ये बात सामने आई है कि पुलिस की फर्जी वर्दी पहनकर ये गैंग न सिर्फ स्थानीय लोगों और हाइवे से गुजरने वाले ट्रकों से जबरन उगाही में मशगूल थे, बल्कि फर्जी थाने पर धड़ल्ले से लोगों की शिकायतें भी दर्ज करते थे। एक तरह से इन्होंने अपना पूरा ताम-झाम इस तरीके से बना रखा था, जिससे लोग इनके थाने और उन्हें असली समझें। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश पुलिस को इस गैंग का पता पहली बार तभी चल गया था जब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ग्वालियर मेले की तैयारियों का औचक निरीक्षण करने के 2017 के दिसंबर में ग्वालियर मेला ग्राउंड पहुंचे थे। उसके बाद डीएसपी-स्तर के एक अधिकारी को 2018 में इस मामले की पूरी जांच सौंपी गई थी। लेकिन, तब वह रिपोर्ट पुलिस ने दबाकर रख ली थी।

कैसे हुआ फर्जी थाने का खुलासा?

कैसे हुआ फर्जी थाने का खुलासा?

इस मामले का खुलासा तब हुआ है जब पुलिस अधिकारी की वह जांच रिपोर्ट व्यापम घोटाले को सामने लाने वाले आशीष चतुर्वेदी के हाथ लग गई। उनके मुताबिक 2017 के दिसंबर महीने की बात है। जब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ग्वालियर मेला ग्राउंड में तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे और खाकी वर्दी पहने चार फ्रजी पुलिस वालों ने उन्हें सलामी ठोकी। चतुर्वेदी के मुताबिक, 'जिस तरह से उन्होंने अपने अफसर को सलामी दी, उससे उन्हें संदेह हुआ। उन्होंने उन सबसे उनका परिचय देने को कहा। उनके जवाब ने उन्हें चौंका दिया। उनमें से दो ने खुद को मजदूर बताया, तीसरे ने कहा वह पेंटर है और चौथा एक सब्जी बेचने वाला निकला। 'इसी के बाद ग्वालियर के तत्कालीन एसपी नवनीत भसीन ने जांच के आदेश दिए थे।

आगे की जांच के लिए कोर्ट में दर्ज करेंगे केस

आगे की जांच के लिए कोर्ट में दर्ज करेंगे केस

चतुर्वेदी ने पुलिस रिपोर्ट के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा है कि, 'रिपोर्ट स्पष्ट है। यह कहता है कि इन चारों लोगों ने एक इंस्पेक्टर के कहने पर खुद को पुलिस वाले की तरह से पेश कर रहे थे। जांच में ये बात सामने आई कि इंस्पेक्टर जिस थाने से काम कर रहा था वह पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं था। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट इस सलाह के साथ पूरी की थी कि आगे उगाही और भ्रष्टाचार की जांच जरूरी है, लेकिन कुछ हुआ नहीं। जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं मैं उनके खिलाफ कोर्ट में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने जा रहा हूं।' यानि, जालसाजी के इस धंधे में किसी पुलिस वाले के ही शामिल होने की आशंका खारिज नहीं की जा सकती, शायद यही वजह है कि पुलिस अपने ही अधिकारी की जांच रिपोर्ट पर कुंडली मारे बैठी थी।

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