Savarkar Jayanti 2025: जब पुलिस की निगरानी में दरवाजा खोलकर सावरकर को जाना पड़ता था टॉयलेट, क्या है ये किस्सा?
Veer Savarkar Jayanti 2025: विनायक दामोदर सावरकर यानी वीर सावरकर, जिनका नाम स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में क्रांति, राष्ट्रवाद और वैचारिक बदलाव का प्रतीक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था जब उन्हें पुलिस निगरानी में खुले दरवाजे से टॉयलेट जाना पड़ता था?
मामला 1910 का है, जब सावरकर को इंग्लैंड से भारत भेजा जा रहा था। उन्हें 'एसएस मोरिया' नाम के जहाज से ब्रिटिश पुलिस अफसरों की निगरानी में भारत लाया जा रहा था। साथ थे दो अंग्रेज अधिकारी - पावर और पार्कर, और दो भारतीय हेड कांस्टेबल - अमर सिंह और मोहम्मद सिद्दीक। आइए जानते हैं विस्तार से...

हर वक्त निगरानी, रात को जलती बत्ती
सावरकर को जहाज में चार बर्थ वाले केबिन में रखा गया था। रात को बत्ती जलाकर रखी जाती, और सावरकर हमेशा किसी की नजर में रहते। जब वो शौचालय जाते, तो दरवाजा पूरी तरह बंद करने की इजाजत नहीं थी - ताकि पुलिस उनकी हर हरकत पर नजर रख सके।
सावरकर की दिमागी चाल - शौचालय से भागने की योजना
जब जहाज फ्रांस के मार्सेय बंदरगाह पर पहुंचा, तो सावरकर ने ऐतिहासिक कदम उठाया। 8 जुलाई 1910 को सुबह, उन्होंने पार्कर से शौचालय जाने की इजाजत मांगी। अमर सिंह और मोहम्मद सिद्दीक बाहर खड़े थे। उन्होंने देखा कि अंदर चप्पलें दिख रही थीं - लगा सावरकर बैठे हैं। लेकिन सच्चाई कुछ और थी।
कमोड के पानी वाले छेद से आजादी की छलांग
जब अमर सिंह ने झांका तो देखा कि सावरकर कमोड के पानी वाले छेद से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। तब तक आधा शरीर बाहर था। सावरकर ने समुद्र में छलांग लगा दी। कांस्टेबल शोर मचाते रहे, लेकिन वीर सावरकर निकल चुके थे।
ब्रिटिश और फ्रेंच पुलिस सकते में
यह पल ब्रिटिश सरकार के लिए तारीख में शर्मिंदगी और भारतीयों के लिए प्रेरणा का दिन बन गया। फ्रांसीसी पुलिस, जो पहले सहयोगी थी, अब असहज हो गई थी। हालांकि बाद में सावरकर को दोबारा गिरफ्तार किया गया, लेकिन उनकी हिम्मत और योजनाबद्ध भागने की कोशिश ने उन्हें एक 'लीजेंड' बना दिया।
सावरकर की जिंदगी से जुड़ी अहम बातें..
- जन्म और शिक्षा: 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में जन्म। पढ़ाई पुणे और फिर 1906 में इंग्लैंड गए।
- अभिनव भारत और क्रांतिकारी गतिविधियां: लंदन में 'India House' और 'Abhinav Bharat' नामक संगठन बनाए।
- 1857 की क्रांति पर अंग्रेज़ों का नैरेटिव तोड़कर लिखी किताब - '1857: The First War of Indian Independence'।
- Hindutva: Who is a Hindu: किताब में उन्होंने हिंदू को सिर्फ धर्म नहीं, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान से जोड़ा।
कालापानी की सजा:
- 1909 में गिरफ्तारी और 1911 में अंडमान की सेलुलर जेल (काला पानी) में दो आजीवन कारावास की सजा - 50 साल।
- 13 साल की अमानवीय यातना के बाद 1924 में सशर्त रिहाई।
मृत्यु और विरासत:
- 26 फरवरी 1966 को स्वेच्छा से उपवास कर प्राण त्याग दिए।
- आज उनकी किताबें, विचार और बलिदान भारतीय राष्ट्रवाद की धरोहर हैं।
वीर सावरकर सिर्फ एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि वो एक विचार, एक साहसिक रणनीतिकार और एक प्रेरणादायक नेतृत्वकर्ता थे। शौचालय जैसी निजी जगह में भी उन्हें कैद किया गया, लेकिन उनकी सोच और आज़ादी की चाह को कोई कैद नहीं कर सका।












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