Veer Savarkar Jayanti: विवादों से परे है सावरकर की वैचारिक विरासत, जो आज भी देती है दिशा

Veer Savarkar Jayanti: 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदुत्व के प्रणेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए प्रेरणास्रोत माने जाने वाले विनायक दामोदर सावरकर को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दिन 1883 में महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में जन्मे सावरकर की स्मृति में मनाया जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 'X' पर एक पोस्ट साझा करके श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने लिखा, "वीर सावरकर जी को उनकी जयंती पर सादर श्रद्धांजलि। मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण विदेशी हुकूमत के क्रूरतम अत्याचारों से भी नहीं डगमगाया। उनकी अदम्य वीरता और स्वतंत्रता संग्राम में संघर्ष की गाथा को देश कभी नहीं भूल सकता। उनका त्याग और समर्पण विकसित भारत के निर्माण में मार्गदर्शक बना रहेगा।"

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इस पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया गया जिसमें प्रधानमंत्री की आवाज में वीर सावरकर के योगदानों की सराहना की गई।

Veer Savarkar Jayanti: कांग्रेस का विरोध, भाजपा का सम्मान

जहाँ भाजपा सावरकर को 'सच्चा देशभक्त' मानती है, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी समय-समय पर उन्हें 'ब्रिटिशों के सेवक' कहकर विवाद खड़ा करते रहे हैं। राहुल गांधी के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी कई बार तीखी प्रतिक्रिया दे चुकी है।

27 मई को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी दादी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी वीर सावरकर को सम्मानित किया था और उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया था।

राहुल गांधी के बयान पर कानूनी कार्रवाई भी हुई। अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके सावरकर को लेकर दिए गए बयान पर नाराजगी जताई थी। उच्चतम न्यायालय ने उन्हें 'स्वत: संज्ञान' में आने की चेतावनी दी थी और भविष्य में ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान से बचने को कहा था।

Who is Veer Savarkar: वीर सावरकर कौन थे?

विनायक दामोदर सावरकर न केवल एक क्रांतिकारी थे, बल्कि एक राजनीतिक विचारक, लेखक और हिंदुत्व के सिद्धांतकार भी थे। 1922 में उन्होंने 'हिंदुत्व' की अवधारणा विकसित की। उन्होंने स्वयं को 'वीर' की उपाधि दी और अपनी आत्मकथा 'चित्रगुप्त' नाम से प्रकाशित की।

सावरकर ने 1904 में फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे में पढ़ाई के दौरान "अभिनव भारत" नामक गुप्त संस्था की स्थापना की। इसके माध्यम से वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष की योजना बनाते थे। बाद में लंदन में उन्होंने "फ्री इंडिया सोसाइटी" की स्थापना की और 1857 की क्रांति पर आधारित प्रसिद्ध पुस्तक "द फर्स्ट वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस" लिखी।

1910 में उन्हें ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार किया और उन्हें अंडमान की सेल्युलर जेल में 50 वर्षों की सजा सुनाई गई। उन्होंने कई बार दया याचिकाएं भेजीं, जिसके बाद 1924 में उन्हें रिहा किया गया।

Veer Savarkar: स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और विरोधाभास

जहाँ एक ओर सावरकर को एक साहसी स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है, वहीं उनकी विचारधारा और कुछ निर्णय विवाद का विषय रहे हैं। 1942 में जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू किया, सावरकर ने इसका विरोध किया।

उन्होंने विभाजन के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया और हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहते हुए मुस्लिम लीग सहित अन्य गैर-कांग्रेसी दलों के साथ सरकार बनाने के लिए हाथ मिलाया। 1948 में गांधीजी की हत्या के मामले में उन्हें सह-षड्यंत्रकारी के रूप में नामित किया गया, हालांकि अदालत ने उन्हें पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

Veer Savarkar: हिंदुत्व और समाज सुधार

सावरकर ने जात-पांत के भेदभाव का विरोध किया और रत्नागिरी में अछूतोद्धार के लिए काम किया। उन्होंने गो-पूजा का समर्थन नहीं किया लेकिन गायों की देखभाल को महत्वपूर्ण बताया। उनका मानना था कि भारत के हिंदू समाज को जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा।

1964 में सावरकर ने यह कहते हुए समाधि लेने की घोषणा की कि स्वतंत्र भारत उनका लक्ष्य था, जो अब पूरा हो गया है। 1966 में उन्होंने उपवास करते हुए शरीर त्याग दिया। 2002 में पोर्ट ब्लेयर हवाई अड्डे का नाम बदलकर 'वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा' रखा गया।

सावरकर जयंती क्यों मनाई जाती है?

हर साल 28 मई को सावरकर जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उनके साहस, विचारधारा और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका की स्मृति में मनाया जाता है। विशेषकर महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भाषण, संगोष्ठी, वाद-विवाद और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े नेता और संगठन इस दिन को विशेष महत्व देते हैं।

वीर सावरकर के जीवंत विचार

  • "भारत की पवित्र भूमि मेरा घर है, उसके वीरों का रक्त मेरी प्रेरणा और उसकी विजय मेरा सपना।"
  • "दुनिया उनका ही सम्मान करती है जो अपने हक के लिए लड़ना जानते हैं।"
  • "जो देश अपने वीरों और शहीदों को नहीं पहचानता, वह धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है।"
  • "स्वतंत्रता कभी दी नहीं जाती, उसे छीनना पड़ता है।"
  • "हिंदू समाज को अगर स्वतंत्रता की सुबह देखनी है तो जाति और संप्रदाय से ऊपर उठना होगा।"
  • "कायर इतिहास नहीं बनाते, इतिहास वीरों के नाम लिखा जाता है।"
  • "हमारा एकमात्र कर्तव्य है - राष्ट्र के लिए लड़ते रहना, चाहे जो भी हो।"
  • "शिक्षित मस्तिष्क स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा हथियार है।"
  • "राष्ट्र का अतीत उसकी नींव है, जिसे संरक्षित और सम्मानित करना आवश्यक है।"
  • "सच्चा नेता वह है जो उदाहरण देकर नेतृत्व करता है, कर्म से प्रेरित करता है और दृष्टि से सशक्त बनाता है।"

वीर सावरकर के जीवन में जहां एक ओर राष्ट्रवाद की लौ जलती थी, वहीं उनके विचारों पर उठते सवाल आज भी भारतीय राजनीति को दो भागों में बाँटते हैं। उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों की संख्या जितनी बड़ी है, उनकी आलोचना करने वालों की आवाज भी उतनी ही मुखर है। बावजूद इसके, इतिहास में उनका स्थान एक अद्वितीय और विचारोत्तेजक व्यक्तित्व के रूप में सदा स्मरणीय रहेगा।

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