तय हो चुकी है भाजपा से वरुण गांधी की विदाई? योगी के मंच पर ना जाने का संदेश साफ

नई दिल्ली, 31 दिसंबर: भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी बीते काफी समय से अपनी सरकार को ही निशाने पर लेते रहे हैं। किसानों का मुद्दा हो, कोरोना या फिर कंगना रनौत की बयानबाजी, वरुण ने पार्टी के खिलाफ जाकर स्टैंड लिया है। ऐसे में लंबे समय से ये माना जा रहा है कि वरुण और उनकी मां मेनका गांधी भाजपा को अलविदा कह सकते हैं। अब पीलीभीत में कुछ ऐसा हुआ है, जिससे लगता है कि वरुण की भाजपा से विदाई तय हो चुकी है।

योगी के कार्यक्रम से दूर रहे वरुण

योगी के कार्यक्रम से दूर रहे वरुण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को पीलीभीत पहुंचे थे। यहां उन्होंने बड़ी रैली की। सीएम के कार्यक्रम में ना सिर्फ पीलीभीत बल्कि पड़ोसी जिले बरेली और शाहजहांपुर के सांसद और नेता पहुंचे। वहीं पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंच से गैरमौजूद रहे। वरुण गांधी बीते काफी समय से क्षेत्र में लगातार घूम रहे हैं लेकिन प्रशासन के आमंत्रण के बावजूद वो इस कार्यक्रम में शिरकत करने नहीं आए।

वरुण का बीजपी से जाना अब औपचारिकता भर?

वरुण का बीजपी से जाना अब औपचारिकता भर?

वरुण गांधी के पार्टी छोड़ने की चर्चा तो बीते डेढ़- दो साल में कई बार हुई है। कभी वरुण के कांग्रेस में जाने की बात कही गई तो कभी उनके टीएमसी में जाने के कयास लगे। अब पीलीभीत के इस कार्यक्रम के बाद माना जा रहा है कि भाजपा में अब वो सिर्फ अपनी संसद सदस्यता बचाने के लिए हैं। पार्टी से उनका नाता तकरीबन टूट चुका है और जाने का औपचारिक ऐलान भर उनको करना है। हालांकि वरुण की ओर से अपने अगले सियासी कदम को लेकर कुछ नहीं कहा गया है।

2019 के चुनाव के बाद से बढ़ी पार्टी से तल्खी

2019 के चुनाव के बाद से बढ़ी पार्टी से तल्खी

भारतीय जनता पार्टी में वरुण गांधी की शुरुआत काफी धमाकेदार रही थी। उनको हिन्दूवादी, फायरब्रांड नेता के तौर पर पेश किया गया था। 2013 में बीजेपी ने वरुण को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया और 2014 में सुल्तानपुर से उनको टिकट दिया। चुनाव में वरुण और उनकी मां मेनका ने जीत दर्ज की। मेनका गांधी को केंद्र में मंत्री बनाया गया लेकिन वरुण को पार्टी के महासचिव पद से हटा दिया गया। फिर 2019 में जब दूसरी बार केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी तो ना मेनका गांधी और ना वरुण गांधी को मंत्री बनाया गया। माना जाता है कि यहीं से उनका भाजपा से मोहभंग हुआ जो सरकार के कामकाज पर उनकी ओर से उठे सवालों से दिखने लगा। इस साल वरुण और मेनका गांधी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी हटा दिया गया। जिसके बाद वरुण और भाजपा के बीच रिश्तों में कड़वाहट से पर्दादारी तकरीबन हट गई। अब देखना ये है कि कब वरुण नया सियासी कदम उठाते हैं।

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