Gujarat News: वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर विधानसभा में संकल्प, सीएम भूपेंद्र पटेल ने पेश किया प्रस्ताव
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य विधानसभा में वंदे मातरम की 150वीं जयंती मनाने का संकल्प लिया, गीत के स्थायी देशभक्ति, भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर ऐतिहासिक प्रभाव और आज एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में इसकी प्रासंगिकता पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के गौरवशाली अवसर पर गुजरात विधानसभा में जश्न मनाने का संकल्प पेश किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम की प्रत्येक पंक्ति में भारत माता का अर्थपूर्ण भक्ति गान है और यह गीत कभी अप्रासंगिक नहीं हो सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही वंदे मातरम की रचना गुलामी के दौर में हुई हो, लेकिन इसके शब्द और अर्थ उस कालखंड तक सीमित नहीं हैं। आज भी यह गीत उतना ही सुसंगत और प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन को गति देने वाला यह गीत अब अमृत काल में विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए नया प्रेरक बल बनेगा।
उन्होंने बताया कि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम की रचना कर राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता चेतना का मार्ग प्रशस्त किया था। इस गीत ने जन-जन में यह विश्वास जगाया कि कोई भी संकल्प असंभव नहीं है। वंदे मातरम का मूल विषय भारत माता है, जिसमें मां भारती की वंदना इस विश्वास के साथ की गई कि गुलामी की बेड़ियां टूटेंगी और उसके संतति ही उसके भाग्य विधाता बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस गीत ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी थी। उस समय वंदे मातरम पर प्रतिबंध लगाया गया और इसे गाने वालों को जेल में डाला गया, यहां तक कि उन पर कोड़े भी बरसाए गए। बावजूद इसके, वंदे मातरम स्वतंत्रता का जयघोष बनकर उभरा और लाखों देशवासियों के समृद्ध भारत के सपने का मंत्र बना।
उन्होंने वंदे मातरम में भारत माता की जल, फल और धन-धान्य से परिपूर्ण छवि, विद्यादायिनी सरस्वती, समृद्धि की प्रतीक लक्ष्मी और शक्ति स्वरूपा दुर्गा के रूप में की गई वंदना का उल्लेख किया। साथ ही 1950 में संविधान सभा द्वारा इस गीत को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिए जाने तक के ऐतिहासिक प्रसंगों का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक प्रसिद्ध और गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम का उद्घोष करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। इस गीत ने देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना को प्रज्वलित किया। हालांकि स्वतंत्रता के बाद दशकों तक मां भारती के गौरव को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को नई ऊर्जा मिली है। ‘मेरी मिट्टी-मेरा देश’, ‘हर घर तिरंगा’ और ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ जैसे अभियानों के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रविरोधी शक्तियों के विरुद्ध भारत माता ‘बहुबलधारिणी’ और ‘रिपुदलवारिणी’ है। उन्होंने कहा कि जब भी देश को चुनौती दी गई, भारत ने सशक्त जवाब दिया है।
सदन में वंदे मातरम के नारों की गूंज के बीच मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की एक काव्य पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आन, बान और शान है। यह स्वतंत्रता संग्राम की आहुति, राष्ट्रभक्ति की मशाल और विकास की अडिग पहचान है।












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