वंदे भारत मिशन के तहत भारत वापस आए 2.75 लाख लोग, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर अभी फैसला नहीं
नई दिल्ली: कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने 25 मार्च से लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था। जिसके बाद लाखों लोग दूसरे देशों में फंस गए थे। उनको वापस लाने के लिए मई में भारत सरकार ने वंदे भारत मिशन शुरू किया। जिसके तहत अब तक 2.75 लाख से ज्यादा लोगों को वापस लाया गया है। आने वाले दिनों में भी ये मिशन जारी रहेगा। वहीं विदेश से वापस लाए जा रहे सभी लोगों को नियमानुसार क्वारंटाइन किया जा रहा है।
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केरल आए सबसे ज्यादा यात्री
मामले में नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अब तक 2.75 लाख से ज्यादा लोगों को एयर इंडिया की विशेष फ्लाइट्स के जरिए वापस लाया गया है। उन्होंने कहा कि ये कोई छोटी संख्या नहीं है, मंत्रालय इस दिशा में अपना 100 प्रतिशत देने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी फ्लाइट की संख्या को बढ़ाने की क्षमता पूरी तरह से गंतव्य स्थान की फ्लाइट को लेने की इच्छा पर निर्भर करती है। सबसे ज्यादा यात्री केरल में आए हैं। इसके अलावा भारतीय नौसेना भी बड़ी संख्या में दूसरे देशों में फंसे भारतीयों को लेकर वापस आई है।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर सस्पेंस बरकरार
वहीं भारत सरकार ने चुनिंदा रूटों पर घरेलू उड़ानों को अनुमति तो दे दी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कब से शुरू होंगी, इस पर सस्पेंस बरकरार है। इस सवाल के जवाब में मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि दूसरे देशों के लिए उड़ानें कब शुरू होंगी, इसका सटीक समय नहीं बताया जा सकता है। मौजूदा वक्त में हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें दूसरे देशों की सीमाएं खुलने पर ही निर्भर करती हैं। फिलहाल नियंत्रण के साथ दूसरे देशों से लोगों को लाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

एयर इंडिया पर मंत्री का बड़ा बयान
नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर अभी मैं जितना आशावान और आत्मविश्वास में हूं, उतना मैं पहले कभी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया एक फर्स्ट क्लास एसेट है, चाहे वुहान से लोगों को निकालना हो या कुछ और, एयर इंडिया इसका दिल है। बता दें कि एयर इंडिया पर 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। वह लंबे समय से नुकसान में चल रही है और इसके पुनरुद्धार के प्रयासों के तहत सरकार ने विनिवेश का निर्णय लिया है।












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