वैक्सीन से कमजोर इम्यूनिटी वालों में कम होता है कोरोना वायरस के म्यूटेशन का खतरा
नई दिल्ली, 6 अगस्त। कोरोना वायरस के अध्ययन के दौरान ये सामने आया है कमजोर प्रतिरक्षा वाले रोगियों में वायरस का म्यूटेशन ज्यादा होता है। हालिया हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि वायरस के म्यूटेशन को कम करने के लिए कमजोर प्रतिरक्षा वाले रोगियों में टीकाकरण को किया जाना चाहिए।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित लेख में शीर्ष अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा है कि वायरस के म्यूटेशन के जोखिम को कम करने के लिए अस्पतालों में कमजोर इम्यूनिटी वाले रोगियों को कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। लेख में कहा गया है कि ऐसे रोगियों को संक्रमण से बचाने के लिए टीकारण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कमजोर इम्यूनिटी वालों को जल्दी वैक्सीन
लेख में कहा गया है कि कमजोर प्रतिरक्षा वाले रोगियों में कोविड-19 का संक्रमण होने पर उन्हें अलग रखने पर जोर दिया जाना चाहिए, जब तक कि उनमें निगेटिव वायरल शेडिंग न दर्ज हो जाए। ऐसे रोगियों के घर में या साथ रहने वाले अथवा करीब संपर्क में आने वाले लोगों को उम्र की परवाह किए बिना टीका लगाया जाना चाहिए। क्योंकि इनके अंदर होने वाला म्यूटेशन संपर्क में आने वाले लोगों में नए संक्रामक स्वरूप के फैलने की वजह बन सकता है।
अमेरिका के शीर्ष डॉक्टरों की टीम की तरफ से ये चेतावनी ऐसे समय में आई है जब डेल्टा वेरिएंट के चलते तेजी से फैल रही कोरोना वायरस महामारी की तीसरी लहर ने कई देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। डेल्टा वेरिएंट को सबसे पहले दिसंबर 2020 में भारत में पहचाना गया था। अब तक इसकी चपेट में कई देश आ गए हैं।
भारत में भी मरीजों पर अध्ययन
कम इम्यूनिटी वाले रोगियों में कोरोनावायरस के संक्रमण को लेकर भारत में भी अध्ययन हुए हैं। दिल्ली के एम्स व एक और प्रमुख अस्पताल में कई ऐसे रोगी मिले हैं जो महीनों तक टेस्ट में पॉजिटिव आते रहे। तपेदिक और एचआईवी बीमारियों के चलते इन मरीजों में लंबे समय तक वायरस रह रहा है। ऐसे रोगियों को टीकाकरण में प्राथमिकता देने पर उन्हें संक्रमण से बचाया जा सकेगा और म्यूटेशन का खतरा भी कम होगा।












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