उत्तराखंड सरकार ने वाकई भरे हैं जल-प्रलय हादसे के ज़ख्म

kedarnath-uttarakhand
देहरादून। कहते हैं हादसे की तसवीरें तो संवर जाती हैं पर तकदीरें संवरने में वक्त लगता है। उत्तराखंड की जल प्रलय के बाद जो ज़ख्म पैदा हुए थे, वो आज भी हरे हैं। इस आपदा से बेघर हुए परिवारों के लिए सरकार अभी तक छत का इंतजाम नहीं कर पायी है। 2500 परिवार साल भर बाद भी किराए के घरों में रहने को मजबूर हैं। हालांकि सरकार बेघर परिवारों को प्रतिमाह 3500 रुपया किराया दे रही है।

कोई बादल फटा ही नहीं था सरकार की इस पहल से साबित होता है कि जो वादे और दावे प्रशासन की ओर से किए गए थे, उन्हें निभाया गया व अब भी निभाया जा रहा है। गौरतलब है कि बीते दिनों से ए‍क निजी टीवी चैनल की मुहि‍म पर दोबारा शुरु हुए कांब‍िंग ऑपरेशन में कई नरकंकाल मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद से ही सरकार को सभी राजनैत‍िक, सामाजिक दल आड़े हाथों ले रहे हैं।

भले ही सरकारी इंतजामात के चलते सर्च ऑपरेशन में लापरवाही बरती गई हो, पर इतना तय है कि अब तक जो हादसे के चश्मदीद रहे हैं उनकी मदद के लिए सरकार ने पुख्ता इंतजामात किए हैं व उन तक जो राहत राश‍ि पहुंचाने का दावा किया जाता रहा, उसे गंभीरता से पूरा किया गया। त्रासदी की तबाही से बाहर न‍िकालने में सरकार ने अहम भूम‍िका निभाई हालांकि बावजूद इसके घाटी में अब तक नरकंकाल बरामद हो रहे हैं।

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