उत्तराखंड पर नेपाल जैसे भूकंप का खतरा सबसे ज्यादा
बेंगलुरू। नेपाल में आये भूकंप के बाद हर कोई इस सोच में पड़ गया है कि उनका क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से कितना सुरक्षित है। बात अगर भारत की करें, तो यहां पर उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यह बात हम नहीं वैज्ञानिक कह रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यहां पर नेपाल से भी ज्यादा विध्वंसक भूकंप आ सकता है।
बेंगलुरु के जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च, बेंगलुरू से संबद्ध शोध के लेखक सीपी राजेंद्रन के अनुसार, "भूदृश्य और भूक्षरण की दर से पता चलता है कि उत्तराखंड में जमीनी परत के विच्छेदन (डकॉलमेंट) के कारण उत्तराखंड में बड़ा भूकंप आने की संभावना बनती है।"
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि एक लंबी भूकंपीय निष्क्रियता के कारण एक लाख से अधिक आबादी वाले इस क्षेत्र में बड़ा भूकंप आने का खतरा है।
मार्च 2015 में अपने अध्ययन में बताया था, "लगभग 700 किलोमीटर लंबी केंद्रीय भूंकपीय खाई, हिमालय के अग्र भाग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पिछले 200-500 सालों के दौरान आए एक बड़े भूकंप में विच्छेदित नहीं हुआ है।"
वैज्ञानिकों के अनुसार मध्य हिमालयी भूकंपीय खाई के पश्चिमी हिस्से में एक अन्य बड़ा भूकंप आने की प्रबल आशंका है। यह आशंका उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में ज्यादा है। उपलब्ध आंकड़े यहां पर एक विशिष्ट भौगोलिक संक्रमण की ओर इंगित कर रहे हैं।
कोई नहीं बता सकता भूकंप की तिथि
लखनऊ विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्री डा ध्रुवसेन सिंह का कहना है कि भूकंप के प्रति संवेदनशील इलाकों को चिन्हित किया जा सकता है, लेकिन यह कभी नहीं बताया जा सकता है कि भूकंप कब आयेगा और कितनी तीव्रता का होगा। क्योंकि धरती के अंदर की ऊर्जा कब बाहर निकलेगी, इसका सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।













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