हर तरह के अपराध में यूपी अव्वल, दलितों पर अत्याचार के मामले में बीजेपी शासित 5 राज्य टॉप में

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश कानून-व्यवस्था और अपराध को लेकर हमेशा चर्चा में रहता है, लेकिन देश में सबसे अधिक अपराध उत्तर प्रदेश में है इस बात की पुष्टि आंकड़ों में भी हो गई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में सबसे अधिक आपराधिक वारदातें उत्तर प्रदेश में हुई हैं। देशभर में हुए कुल अपराध में से अकेले उत्तर प्रदेश में 9.5 फीसदी आपराधिक घटनाएं हुई हैं। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज एनसीआरबी के आंकड़ों को जारी किया है। इस वर्ष एनसीआरबी ने कुल 19 मेट्रोपोलिटन शहरों को शामिल किया है, जहां की आबादी 20 लाख से अधिक है। पहली बार इस लिस्ट में लापता लोगों जिसमे बच्चे भी शामिल हैं, जाली नोट और हथियार जब्त किए जाने के मामलों को शामिल किया गया है।

हत्या, लूट, किडनैपिंग कम हुई

हत्या, लूट, किडनैपिंग कम हुई

आंकड़ों के अनुसार कुल 4831515 संज्ञेय अपराध के मामले हैं, जिसमे से 2975711 मामले आईपीसी के हैं, जबकि 1855804 मामले स्पेशल एंड लोकल लॉ के हैं। इन आकंड़ों की 2015 के आंकड़ों से तुलना करें तो पिछले वर्ष की तुलना में इस बार एसएलएल के मामलों में 2.6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है जबकि आईपीसी के तहत मामलों में 0.9 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार हत्या के मामलों में कमी आई है, हत्या के मामलों में 5.2 फीसदी की कमी आई है। दंगों के मामले में 5 फीसदी की कमी आई है, लूट की घटनाओं में 11.88 फीसदी की कमी आई है, किडनैपिंग के मामलों में 6 फीसदी की कमी आई है।

महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध

महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध

महिलाओं के खिलाफ अपराध पर नजर डालें तो इसमे 2015 की तुलना में 2016 में 2.9 फीसदी की बढ़ोतरी आई है, जिसमे सबसे अधिक मामले पति द्वारा अत्याचार या फिर ससुराल में अपराध के मामले सबसे अधिक हैं। ससुराल या पति द्वारा महिलाओं के खिलाफ अपराध में 32.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं दूसरे पायदान पर महिला का शील भंग करने के अपराध हैं, ऐसे मामलों में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि महिलाओं को बंधक बनाए जाने या उन्हें किडनैप करने के मामलों में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं बलात्कार के मामलों में 11.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

अपराध की लिस्ट में यूपी सबसे उपर

अपराध की लिस्ट में यूपी सबसे उपर

अपराध के मामलों में पहले पायदान पर उत्तर प्रदेश तो दूसरे पायदान पर मध्य प्रदेश है, उत्तर प्रदेश में 4882 यानि 12.5 फीसदी तो मध्य प्रदेश में 4816 यानि 12.4 फीसदी आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। तीसरे पायदान पर महाराष्ट्र है जहां 4819 यानि 10.7 फीसदी आपराधिक मामलों में बढ़ोतरी हुई है। एससी, एसटी के खिलाफ अत्याचार के मामलों में 2016 में 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कुल 40801 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमे से अकेले उत्तर प्रदेश में 10426 मामले हैं। एससी, एसटी के खिलाफ अत्याचार के 25 फीसदी मामले अकेले उत्तर प्रदेश में हुए हैं, जबकि बिहार में 14 फीसदी (5701), राजस्थान में 12.6 फीसदी (5134) मामले दर्ज हुए हैं। वहीं साइबर क्राइम के मामलों में भी 6.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

आईपीसी के तहत सबसे अधिक मामले दिल्ली में

आईपीसी के तहत सबसे अधिक मामले दिल्ली में

देश में मानव तस्करी के कुल 8132 मामले दर्ज किए गए हैं, पश्चिम बंगाल में 3579 मामले दर्ज किए गए हैं। गत वर्ष 111569 बच्चे देश में लापता हुए थे, जिसमे से 55944 बच्चों को ढूंढ़ लिया गया है। वहीं आर्म्स एक्ट के तहत हथियार जब्त करने के कुल 53929 मामले दर्ज किए गए हैं। 281839 जाली नोट जिनकी कुल कीमत 159250181 रुपए है को जब्त किया गया है। आईपीसी के तहत अपराध के कुल 38.8 8 फीसदी मामले दिल्ली में दर्ज हुए हैं, जबकि बेंगलुरू में 8.9 फीसदी तो मुंबई में 7.7 फीसदी मामले हैं। वर्ष 2016 में देशद्रोह के कुल 35 मामले दर्ज किए गए, जिसमे से हरियाणा में 12 व उत्तर प्रदेश में 6 मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस हिरासत में 2016 में कुल 60 लोगों की मौत हुई है, जिसमे से अकेले महाराष्ट्र में 16 लोगों की मौत हुई थी।

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