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UP Lok Sabha Chunav: 9वीं बार लोकसभा पहुंचेंगी मेनका गांधी? सुल्तानपुर में क्या है बीजेपी का हाल

Uttar Pradesh Lok Sabha Election: गांधी-नेहरू परिवार की वजह से अमेठी और रायबरेली लोकसभा चुनावों की चर्चा देश-विदेश तक में हो रही है। लेकिन, अमेठी से महज 30 किलोमीटर दूर एक और लोकसभा सीट है-सुल्तानपुर, जहां से गांधी परिवार का ही एक सदस्य 9वीं बार लोकसभा पहुंचने के लिए चुनाव मैदान में है।

सुल्तानपुर से मेनका गांधी दूसरी बार चुनाव लड़ रही हैं। अमेठी और रायबरेली के मुकाबले इस सीट का चुनावी सीन बहुत ही अलग है। इससे पहले वो पीलीभीत और आंवला लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह मौजूदा 17वीं लोकसभा की सबसे वरिष्ठ सांसद हैं।

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सुल्तानपुर में लोकप्रिय नजर आती हैं मेनका
सुल्तापुर से मेनका भले दूसरी बार ही चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन क्षेत्रीय मामलों को सुलझाने की उनकी समझ और उसमें उनकी दिलचस्पी ने उन्हें यहां काफी लोकप्रिय बनाया है। वह भाजपा की उम्मीदवार हैं, लेकिन सुल्तानपुर में लगता है कि उनकी लोकप्रियता जाति और धर्म की दीवार तोड़ रही है।

अपने काम करने के तरीके को 'मातागिरी' कहती हैं मेनका
इलाके में मेनका समर्थक उन्हें 'माताजी' कहकर बुलाते हैं। हालांकि वह क्षेत्र में अपने काम करने के तरीके को 'मातागिरी' कहती हैं। वे समर्थकों से कहती हैं, 'आपने जो कुछ भी कहा, मैंने किया। लेकिन, सबसे ज्यादा बढ़-चढ़कर मैंने आपमें से हर एक की सुरक्षा के लिए काम किया है।'

सुल्तानपुर में सपा कभी नहीं जीती है चुनाव
67 वर्षीय मेनका 2019 में सुल्तानपुर आने से पहले 6 बार पीलीभीत और एक बार आंवला से चुनाव जीत चुकी हैं। समाजवादी पार्टी ने उनके खिलाफ बीएसपी सरकार में मंत्री रह चुके राम भुवाल निषाद को उतारा है, तो बसपा से उदय राज वर्मा चुनाव मैदान में हैं। सपा इस सीट से कभी नहीं जीती है। लेकिन, इस बार मुस्लिम, यादव के अलावा निषाद, दलितों के एक वर्ग और कुछ अन्य ओबीसी वोटरों के भरोसे लड़ रही है।

सपा समर्थक भी मेनका के मुरीद
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद इरफान नाम के एक सपा समर्थक भी कहते हैं, 'ताहिर खान (बसपा के) के बाद अगर किसी ने यहां काम किया है तो वह मेनका गांधी हैं।' हाल के चुनाव अभियान में इतना हिंदू-मुसलमान होने के बाद भी फहीम नाम के एक दुकानदार मेनका के कार्यों की सराहना करते नहीं हिचकिचा रहे।

मेनका पर शहरी इलाकों पर ज्यादा ध्यान देने के आरोप
हालांकि, सुल्तानपुर में मेनका का कोई विरोध है ही नहीं, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता। मसलन, प्रशांत सिंह नाम के एक स्थानीय का मानना है कि मौजूदा सांसद ने जो कुछ किया है, वह शहर तक ही सीमित है, गांवों में बहुत कम किया है। लेकिन, सुल्तानपुर शहर के भाजपा महासचिव प्रवीण मिश्रा आंकड़ें देकर बताते हैं कि 'जीतने के बाद वह हर गांव में दो बार जा चुकी हैं।'

भाजपा के लोग अटल बिहारी वाजपेयी से करने लगे हैं तुलना
भाजपा नेता का दावा है कि वह कोविड के दौरान भी यहां आईं। उनके अनुसार सुल्तानपुर के करीब 18 लाख वोटरों में से वह बीते पांच वर्षों में करीब 13 लाख लोगों से सीधे बात कर चुकी हैं। चुनावों के दौरान भी सुबह में वह करीब ढाई घंटे दरबार लगाती हैं और 200 से 250 लोगों की शिकायतें सुनती हैं, जिनमें से एक-चौथाई मुसलमान और कुछ यादव भी होते हैं।

बीजेपी नेता ने उनकी तुलना अटल बिहारी वाजपेयी से करते हुए कहा कि वह किसी की मदद करते समय उसका उपनाम नहीं पूछतीं। उनके मुताबिक, 'चुनावों में मोदीजी तो रहेंगे ही, लेकिन मेनका जी की लोकप्रियता दाल में घी का काम करेगा और जीतने का मार्जिन बढ़ाएगा, हम जीत का मार्जिन तीन लाख रहने की उम्मीद कर रहे हैं।'

सपा उम्मीदवार मेनका पर अहंकारी होने का लगा रहे हैं आरोप
वरुण गांधी के अपनी मां के लिए प्रचार करने के बारे में पूछने पर भाजपा नेता ने कहा कि 'उनकी सेहत भी ठीक नहीं है, लेकिन उनकी जरूरत भी नहीं है, वही काफी हैं।' लेकिन, सपा प्रत्याशी निशाद का कहना है, 'हम सिर झुका कर वोट मांगते हैं। वह लोगों को वोट देने का एक तरह से आदेश देती हैं। वह मंत्रियों तक को बंदर और भालू कह देती हैं।'

मेनका गांधी अभी कार्यकाल के हिसाब से सबसे वरिष्ठ लोकसभा सांसद हैं। इस चुनाव में अगर वह जीतती हैं तो 18वीं लोकसभा में वह 9 बार की सांसद हो जाएंगी।

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