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मैं पहले जीन्स,टी-शर्ट पहनती थी, लेकिन सामाजिक कार्य करने के लिए मुझे साड़ी और जूड़ा बांधना पड़ा- सुधा मूर्ति

इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति पत्नी सुधा मूर्ति (71) भारत की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इंफोसिस की के एनजीओ इंफोसिस फाउंडेशन से इस महीने सेवानिवृत्त होगीं।

नई दिल्ली, 11 दिसंबर। इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति पत्नी सुधा मूर्ति (71) भारत की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इंफोसिस की के एनजीओ इंफोसिस फाउंडेशन से इस महीने सेवानिवृत्त होगीं। 1996 में स्थापित इस एनजीओ का सुधा मूर्ति ने 25 सालों तक नेतृत्व किया। सुधा मूर्ति ने अपना सारा जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया। परोपकार को लेकर सुधा मूर्ति ने कहा कि कोई व्यक्ति परोपकार तभी कर सकता है जब वह लोगों की परेशानियों को करीब से समझे।

सामाजिक कार्य शुरू करते समय आपको अपने अंदर क्या-2 बदलाव लाने पड़े

सामाजिक कार्य शुरू करते समय आपको अपने अंदर क्या-2 बदलाव लाने पड़े

एक प्रतिष्ठित न्यूज वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में सुधा मूर्ति से पूछा गया कि जब आपने सामाजिक कार्य शुरू किया तो आपको अपने अंदर क्या बदलाव लाने पड़े। इस प्रश्न का जवाब देते हुए सुधा ने कहा कि मैं पहले जीन्स और टी-शर्ट पहना करती थी। छोटे बाल रखती थी। लेकिन जब में इस वेशभूषा में लोगों के बीच जाती तो वे मुझे पराया समझते। वे समझते थे कि यह हम जैसी नहीं है, हम से अलग है। वे मुझसे जुड़ाव महसूस नहीं करते थे। आपको लोगों से जुड़ने के लिए उन जैसा दिखना होगा, आम आदमी की तरह। बिल्कुल साधाराण। मैंने उनके साथ खाना खाया। उनके साथ भोजन बांटा और उन्हीं की भाषा में उनसे बातचीत की। उनकी परेशानियों को ध्यान से सुना। कभी कभार आपके पास उनकी परेशानियों का हल नहीं होता, लेकिन फिर भी आपको उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए।

लोग जीवन में बहुत जल्द निराश हो जाते हैं, जीवन कठिनाइयों से भरा है

लोग जीवन में बहुत जल्द निराश हो जाते हैं, जीवन कठिनाइयों से भरा है

मैंने इसके बाद साड़ी पहनना शुरू कर दिया और जूड़ा बांधना शुरू किया और फिल मैंने उनको बताया कि मैं एक टीचर हूं। फिर मैंने उनके साथ बातचीत शुरू की। फिर मैंने महसूस किया कि वो जिंदगी में क्या चाहते हैं। दूसरी चीज जो मैंने बदली वो था मेरा धैर्य। मैंने सीखा कि कितनी कठिनाइयां होती हैं और लोग निराश हो जाते हैं; आपको चुप रहना चाहिए और उनकी बातें सुननी चाहिए। उनको समझना चाहिए। उनको सुनें समझें और फिर हल निकालें।

भगवान ने मुझे सबकुछ दिया, इसलिए मैं उसके बच्चों की सेवा करना चाहती हूं

भगवान ने मुझे सबकुछ दिया, इसलिए मैं उसके बच्चों की सेवा करना चाहती हूं

तीसरी चीज जो मैंने महसूस की वह यह कि जीवन कठिनाइयों से भरा पड़ा है। आपको भगवान को हमेशा धन्यवाद करना चाहिए। मुझे भगवान ने सब कुछ दिया और इसलिए मैं अब उसके बच्चों की सेवा कर रही हूं। उन्होंने कहा कि मैं इंफोसिस फाउंडेशन से निकलकर भी देश सेवा करती रहूंगी। मेरे लिए कोई सीमाएं नहीं हैं। हां मैं अपनी पुरातत्व की पढ़ाई पूरी करना चाहती हूं। मुझे इसका बहुत शौक है।

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