हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाई को लेकर FDA ने जारी की चेतावनी, हार्ट के लिए है खतरनाक
नई दिल्ली: कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। अभी तक इसकी कोई भी दवा या वैक्सीन नहीं बन पाई है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना की इस लड़ाई में गेम चेंजर बताया था, लेकिन उनके दावे को अमेरिका के ही कई संस्थानों ने खारिज कर दिया है। अब यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। जिसमें इसके साइड इफेक्ट को बताया गया है।
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इमरजेंसी में ही जाए दवा
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर रिसर्च के बाद एफडीए ने कहा कि इस दवा से कई साइड इफेक्ट हैं. जिसका हार्ट पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में ये दवा सिर्फ कोरोना पॉजिटिव मरीज को केवल इमरजेंसी में ही दी जाए। एफडीए के मुताबिक इन दवाओं के फायदे और साइड इफेक्ट पर अभी ट्रायल चल रहा है। फिलहाल अभी साइड इफेक्ट पर ध्यान देना चाहिए। एफडीए चाहता है कि मरीज के इलाज के दौरान डॉक्टरों को ज्यादा से ज्यादा मदद मिल सके, इसलिए उन्होंने ये एडवाइजरी जारी की है। जिसके तहत आपातकालीन स्थिति में इस दवा का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। एफडीए के मुताबिक जब तक इसका क्लीनिक ट्रायल डाटा उपलब्ध न हो तब तक डॉक्टर इसका प्रयोग किशोर और व्यस्क मरीजों पर न करें।

अमेरिका भेजी गई थी 35 लाख टैबलेट
चीन से वुहान से शुरू हुए कोरोना वायरस ने अमेरिका की कमर तोड़ दी है। अब तक वहां 9 लाख से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जबकि 50 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। कुछ रिसर्च में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना के इलाज के लिए सबसे कारगर बताया गया था। जिसके बाद सबसे बड़े उत्पादक देश भारत ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी थी। इस पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन भेजने का आग्रह किया था। जिसके बाद मोदी सरकार ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात से सशर्त पाबंदी हटाते हुए 35 लाख टैबलेट अमेरिका भेजी थी।

भारत में भी चल रही है रिसर्च
दुनिया में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर कई रिसर्च की गई हैं। जिसमें इसके साइड इफेक्ट बताए गए हैं। अब भारत में भी इसको लेकर ट्रायल चल रहा है। मैक्स अस्पताल कोविड-19 का इलाज करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को इसे दे रहा है। साथ ही इसके दुष्प्रभावों की रिपोर्ट तैयार कर रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों पर किए गए अध्ययन से ये पता लगाया जाएगा कि दवा के खाने से क्या उन्हें कोरोना संक्रमण के खतरे से दूर रखा जा सकता है या नहीं।












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