US Deportation: क्या अमेरिका से डिपोर्ट सिखों की पगड़ी उतरवाई गई थी? विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

US Deportation: अवैध भारतीय प्रवासियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर उठे विवाद के बीच भारत सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष सिखों के धार्मिक अधिकारों के उल्लंघन पर आपत्ति जताई है। यह आरोप लगाए गए थे कि निर्वासितों को बिना पगड़ी के यात्रा करने के लिए मजबूर किया गया।

हालाँकि, अमेरिका ने इन आरोपों को नकार दिया है। आज इसको लेकर राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने जवाब दिया है।

US Deportation

दस्तार जबरन उतरवाने का आरोप

पिछले महीने अमेरिका से अमृतसर लौटाए गए 112 भारतीयों में शामिल जतिंदर सिंह ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने उनकी पगड़ी (दस्तार) जबरदस्ती उतरवा कर कूड़ेदान में फेंक दी। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के डिटेंशन कैंप में बिताए गए दो हफ्तों के दौरान उन्हें प्रताड़ित किया गया और उचित भोजन नहीं मिला। जतिंदर सिंह ने यह आरोप भी लगाया कि उन्हें 36 घंटे तक अमेरिकी सैन्य विमान में बेड़ियों में रखा गया।

हरभजन सिंह ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह के सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि यह मामला अमेरिकी प्रशासन के समक्ष उठाया गया था। अमेरिका की ओर से जवाब मिला कि किसी भी निर्वासित व्यक्ति को धार्मिक सिर ढकने वाले कपड़े (पगड़ी) को हटाने के लिए नहीं कहा गया था।

गुरुवार को संसद में हरभजन सिंह द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री ने कहा, 'भारत सरकार ने अमेरिका से आग्रह किया है कि भारतीय नागरिकों की धार्मिक संवेदनाओं और भोजन संबंधी प्राथमिकताओं का निर्वासन के दौरान ध्यान रखा जाए," मंत्री ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया।'

अमेरिका ने आरोपों से इनकार किया

सरकार के अनुसार, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि 5, 15 और 16 फरवरी को भेजे गए निर्वासितों को किसी भी धार्मिक प्रतीक को हटाने के लिए मजबूर नहीं किया गया था। अमेरिका का कहना है कि इन उड़ानों में निर्वासितों ने धार्मिक सुविधाओं की कोई मांग नहीं की, सिवाय शाकाहारी भोजन के अनुरोध के।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह जरूर कहा कि कुछ व्यक्ति पहले से ही बिना पगड़ी के अमेरिका की सीमा पर पहुंचे थे।

मामले में खूब हुई राजनीतिक

अमेरिका से निर्वासित किए गए अधिकतर भारतीय पंजाब और हरियाणा के थे। कुछ वीडियो और तस्वीरों में उन्हें बेड़ियों में दिखाए जाने के बाद देश में राजनीतिक विवाद छिड़ गया। विपक्षी दलों ने इस पूरे निर्वासन प्रक्रिया में कथित दुर्व्यवहार को लेकर सवाल उठाए।

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भारत सरकार ने दर्ज कराया था विरोध

भारत सरकार ने विशेष रूप से 5 फरवरी की उड़ान में निर्वासितों के साथ हुए व्यवहार पर अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया, खासकर महिलाओं को बेड़ियों में रखने को लेकर। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि निर्वासन उड़ानों में किसी भी महिला या बच्चे को बेड़ियों में नहीं रखा गया था।

सरकार ने कहा कि भारत में उतरने के बाद निर्वासितों के बयान दर्ज किए गए, जिनके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि वह अमेरिका के साथ इस मुद्दे पर लगातार संपर्क में है ताकि भविष्य में ऐसे निर्वासन अभियानों के दौरान निर्वासितों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके।

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