Donald Trump Deportation: 'हाथ में हथकड़ी..न बाथरूम न पानी', ट्रंप की डिपोर्ट नीति पर ब्राजीलियों की आपबीती
US Brazil Deportation News: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की कठोर इमिग्रेशन पॉलिसी के तहत अमेरिका से डिपोर्ट नागरिकों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर विवाद बढ़ता जा रहा है। हाल ही, में एक चार्टर विमान से ब्राजील के मनौस शहर पहुंचे 88 ब्राजीलियाई प्रवासियों ने अपने साथ हुए अपमानजनक व्यवहार की शिकायत की।
यह घटना ट्रंप प्रशासन की नीतियों और उनके अमल पर मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ब्राजील की घटना ने यह साबित कर दिया कि इस प्रक्रिया में मानवीय मूल्यों की अनदेखी की जा रही है। आइए जानते हैं किन-किन परेशानियों गुजरे ब्राजील के लोग...

विमान में कैसा था हाल?
- डिपोर्ट प्रवासियों को हथकड़ी लगाई गई थी।
- विमान में पानी और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
- अत्यधिक गर्मी के कारण कुछ यात्री बेहोश हो गए।
- अमेरिकी अधिकारियों ने प्रवासियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया।
ब्राजील के न्याय मंत्री रिकार्डो लेवांडोव्स्की ने इस घटना को "मानवाधिकारों की घोर अवहेलना" करार दिया और अमेरिकी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
प्रवासियों का दर्द: उनकी जुबानी
चार्टर विमान में मौजूद रहे 31 वर्षीय कंप्यूटर टेक्निशीयन एडगर दा सिल्वा मौरा ने बताया कि हमारे हाथ-पैर बंधे हुए थे। हमें पानी तक नहीं दिया गया। बाथरूम जाने की इजाजत भी नहीं थी। गर्मी इतनी थी कि कई लोग बेहोश हो गए। 21 वर्षीय फ्रीलांसर लुइस एंटोनियो रोड्रिग्स सैंटोस ने कहा कि एयर कंडीशनिंग के बिना चार घंटे की उड़ान एक बुरा अनुभव जैसी थी।
ब्राजील ने ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी पर जताया विरोध
- न्याय मंत्री का हस्तक्षेप: अमेरिकी अधिकारियों को तुरंत हथकड़ी हटाने का निर्देश दिया गया।
- राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा का आदेश: प्रवासियों को सम्मानपूर्वक उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए ब्राजीलियाई वायु सेना का विमान भेजा गया।
- विदेश मंत्रालय की कार्रवाई: अमेरिकी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया।
ब्राजील के मानवाधिकार मंत्री ने बताया कि इन प्रवासियों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार से पीड़ित बच्चे भी शामिल थे, जिनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
ट्रंप की डिपोर्ट नीति: मानवाधिकारों पर सवाल
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में अवैध प्रवास पर सख्ती बरतने की नीति अपनाई है।
- सैन्य विमानों का उपयोग: निर्वासन प्रक्रिया को तेज करने के लिए।
- शरण प्रतिबंध: नए और कड़े नियम लागू किए गए हैं।
- 'राष्ट्रीय आपातकाल' की घोषणा: दक्षिणी सीमा पर प्रवासियों की संख्या नियंत्रित करने के लिए।
हालांकि, इन नीतियों ने मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोपों को जन्म दिया है।
क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय समुदाय?
ट्रंप प्रशासन की डिपोर्ट नीति ने लैटिन अमेरिकी देशों में रोष पैदा किया है।
- ब्राजील: प्रवासियों के अपमानजनक व्यवहार की निंदा की।
- कोलंबिया: अमेरिकी निर्वासन उड़ानों को अस्वीकार किया, लेकिन ट्रंप की चेतावनियों के आगे घुटने टेके।
- मेक्सिको: अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने क्षेत्र में उतरने की अनुमति देने से इनकार किया।
डिपोर्ट की प्रक्रिया और विवाद
हालांकि निर्वासन उड़ानें पहले भी होती थीं, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इन उड़ानों में सैन्य विमानों का उपयोग करना शुरू किया है। ग्वाटेमाला और ब्राजील जैसे देशों को निर्वासन उड़ानों के माध्यम से प्रवासियों को वापस भेजा जा रहा है। हाल ही में दो सैन्य विमानों के जरिए 265 प्रवासी भेजे गए। इन उड़ानों में बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन स्पष्ट है, जैसा कि ब्राजील की घटना ने उजागर किया।












Click it and Unblock the Notifications