गौतम अदाणी केस: अमेरिकी न्याय विभाग का बड़ा खुलासा, मीडिया की अटकलों पर लगा पूर्ण विराम
अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने के फैसले पर चल रही मीडिया अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। विभाग ने उन खबरों को पूरी तरह "गलत" और तथ्यों से परे बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि यह कदम अदाणी समूह द्वारा अमेरिका में किए जाने वाले संभावित निवेश से जुड़ा है।

फेडरल कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आर. ट्रेंट मैककॉटर्स ने स्पष्ट किया कि सिक्योरिटीज से जुड़े आरोपों को हटाने का फैसला पूरी तरह से मामले की कानूनी मेरिट के आधार पर लिया गया था। उन्होंने कहा कि निवेश को लेकर किसी भी चर्चा से पहले ही यह निर्णय लिया जा चुका था। मैककॉटर्स ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह बिल्कुल गलत है," जिनमें विभाग के फैसले को अमेरिका में होने वाले निवेश से प्रभावित बताया गया था।
फाइलिंग के मुताबिक, मैककॉटर्स ने जोर देकर कहा कि "निवेश का जिक्र हो या न हो, वह हर हाल में इन आरोपों को खारिज करने की मांग करते।" उन्होंने साफ किया कि यह फैसला सबूतों, कानूनी दलीलों और अभियोजन व बचाव पक्ष के वकीलों द्वारा पेश किए गए तथ्यों की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है।
न्याय विभाग ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से चल रही खबरों की भी कड़ी आलोचना की। मैककॉटर्स ने इन सूत्रों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए विभाग के ही कुछ वर्तमान और पूर्व अधिकारियों पर आंतरिक चर्चाओं की जानकारी लीक करने का आरोप लगाया। फाइलिंग में कहा गया, "मुझे भरोसा है कि कोर्ट अज्ञात सूत्रों के आधार पर की जा रही ऐसी सनसनीखेज रिपोर्टिंग पर कभी यकीन नहीं करेगा।"
विभाग ने तर्क दिया कि ऐसी खबरों में केस की उन बड़ी कमजोरियों को नजरअंदाज कर दिया गया, जिनकी वजह से यह फैसला लेना पड़ा। इनमें क्षेत्राधिकार (jurisdictional) से जुड़े मुद्दे, निवेशकों को किसी तरह का नुकसान न होना, सबूतों की कमी और भारत में अधिकारियों द्वारा की जा रही समानांतर जांच जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।
मैककॉटर्स ने कहा कि इस मामले पर सार्वजनिक चर्चा मीडिया में चल रहे गुमनाम दावों के बजाय आधिकारिक कानूनी रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए।
अपनी सबसे सख्त टिप्पणी में न्याय विभाग ने कहा कि कथित तौर पर जानकारी लीक करने की कोशिशें आखिरकार उल्टी पड़ गईं। इसकी वजह से विभाग को सार्वजनिक रूप से उन "बड़ी खामियों" का विस्तार से खुलासा करना पड़ा, जिनके कारण अभियोजन पक्ष का केस कमजोर था।
फाइलिंग के अंत में कहा गया कि अज्ञात सूत्रों पर आधारित मीडिया रिपोर्ट्स को विभाग के उस औपचारिक कानूनी आकलन से ऊपर नहीं रखा जा सकता, जिसमें यह माना गया है कि इस केस को आगे बढ़ाना अब उचित नहीं है।












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