गौतम अदाणी केस में बड़ा मोड़: अमेरिकी विभाग ने क्यों कहा 'निवेशकों का एक पैसा नहीं डूबा'?
अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामला वापस लेने के पीछे 'निवेशकों को नुकसान न होने' को सबसे बड़ी वजह बताया है। विभाग का तर्क है कि इस मामले से जुड़ी सिक्योरिटीज खरीदने वाले किसी भी निवेशक को कोई वित्तीय घाटा नहीं हुआ है।

सभी आरोपों को खारिज करने के लिए अदालत में दाखिल अर्जी में DoJ ने कहा कि ये सिक्योरिटीज दुनिया के सबसे अनुभवी और बड़े संस्थागत निवेशकों ने खरीदी थीं, जिन्हें बिना किसी रुकावट के उनका भुगतान मिलता रहा। न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आर. ट्रेंट मैकॉटर ने फाइलिंग में स्पष्ट किया, "इन सिक्योरिटीज पर निवेशकों का एक पैसा भी नहीं डूबा है।" विभाग के मुताबिक, दो नोट इश्यू का पूरा भुगतान पहले ही किया जा चुका है, जबकि बाकी का भुगतान भी समय पर हो रहा है और इसमें किसी तरह का जोखिम नजर नहीं आता।
फाइलिंग में बताया गया कि ये सिक्योरिटीज शुरुआत में बेहद अनुभवी विदेशी अंडरराइटर्स के जरिए बेची गई थीं। इन्हें खरीदने वाले क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) थे, जिनमें से कई विदेशी निवेश फर्में हैं और उनके पास बाजार विश्लेषण की जबरदस्त क्षमता है। न्याय विभाग का मानना है कि ऐसी स्थिति में अदालत में 'क्रिमिनल फ्रॉड' साबित करना मुश्किल होता, क्योंकि अभियोजन पक्ष को जूरी को यह समझाना पड़ता कि इतने अनुभवी निवेशक कॉर्पोरेट गवर्नेंस और कंप्लायंस से जुड़े बयानों से गुमराह हो गए।
विभाग ने जोर देकर कहा कि अगर निवेशकों ने उन बयानों पर भरोसा किया भी था, तो भी उन्हें कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। फाइलिंग के अनुसार, निवेशकों को नुकसान न होना ही इस केस की समीक्षा और इसे बंद करने का मुख्य आधार बना। मैकॉटर ने आगे कहा कि कोई भी निवेशक मुआवजे (restitution) का हकदार नहीं होता क्योंकि भरपाई के लिए कोई घाटा हुआ ही नहीं था, जिससे आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाने का आधार कमजोर हो गया।
अदालती दस्तावेज में यह भी जिक्र किया गया कि इन्हीं तथ्यों पर आधारित एक सिविल केस पहले ही सुलझाया जा चुका है। विभाग के अनुसार, इससे यह साफ हो गया कि अब आपराधिक मुकदमा चलाने की कोई जरूरत नहीं है। कुल मिलाकर, न्याय विभाग ने माना कि निवेशकों को नुकसान न होना और कानूनी व क्षेत्राधिकार से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए गौतम अदाणी के खिलाफ सिक्योरिटीज फ्रॉड का मामला जारी रखना सही नहीं था।












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