आर्थिक रूप से सवर्ण आरक्षण में क्या है मोदी सरकार की बड़ी मुश्किल
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में महज कुछ ही महीने का समय बचा है, ऐसे में जिस तरह से मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने का बड़ा सियासी दांव चला है उसकी वजह से जबरदस्त सियासी घमासान मचा है। एक तरफ जहां कुछ राजनीतिक दलों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए समर्थन की बात कही है तो कुछ ऐसे भी दल और नेता हैं जो सरकार के इस फैसले की आलोचना कर कर रहे हैं और इसे एक और जुमला करार दे रहे हैं।

संवैधानिक अड़चन
हालांकि मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के फैसले को कैबिनेट में मुहर लगा दी है। लेकिन इसके बाद भी इस इस विधेयक को संसद में पास कराना बड़ी चुनौती है। हालांकि विपक्ष के सामने सरकार के इस बिल का विरोध करना आसान नहीं होगा। लेकिन बावजूद इसके मौदी सरकार के सामने इस बिल को लेकर कई संवैधानिक अड़चने हैं। इस बिल के पास होने में सबसे बड़ी अड़चन सु्प्रीम कोर्ट का वह फैसला है जिसमे कोर्ट ने अधिकतम आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय की है।

क्या है मुश्किल
सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 16(4) का जिक्र करते हुए कहा था कि पिछड़ेपन का मतलब सामाजिक पिछड़ेपन से हैं नाकि आर्थिक पिछड़ेपन से। सामाजिक पिछड़ेपन का कारण शैक्षणिक और आर्थिक रूप से कमजोर होना है। ऐसे में मोदी सरकार के फैसले के बाद आरक्षण की सीमा 50 फीसदी को पार कर जाएगी, लिहाजा इसकी न्यायिक समीक्षा की जाएगी, ऐसे में सरकार के इस फैसले का कोर्ट में ठहर पाना मुश्किल है।

दो राज्यों में खारिज हुआ प्रस्ताव
आपको बता दें कि इससे पहले राजस्थान सरकार ने भी विशेष पिछड़ा वर्ग कोटा के तहत आरक्षण देने का प्रस्ताव पेश किया था, उस वक्त भी यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और कोर्ट ने आरक्षण के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। वहीं मराठाओं को 16 फीसदी आरक्षण देने का महाराष्ट्र सरकार भी प्रस्ताव लेकर आई थी, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने इसमे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इन दोनों ही मामलों में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी को पार कर रही थी और दोनों ही फैसलों को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। लिहाजा मोदी सरकार के प्रस्ताव का कोर्ट में टिक पाना आसान नहीं होगा।

क्या कहना है केंद्रीय मंत्री का
केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने कहा कि 50 फीसदी आरक्षण की सीमा को लेकर किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होगी। उनका कहना है कि 50 फीसदी सामान्य वर्ग के आरक्षण में से ही 10 फीसदी आरक्षण गरीब सवर्णों को दिया जाएगा। लिहाजा इसकी वजह से कोर्ट के निर्देश की अवहेलना नहीं होगी। उन्होंने साफ किया है कि सवर्ण, ईसाई, मुसलमानों को भी इसमे आरक्षण दिया जाएगा। यह आरक्षण सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में दिया जाएगा।












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