Lok Sabha Chunav: कांग्रेस के चाणक्य को क्यों संभालना पड़ा राहुल के लिए मोर्चा? बर्थडे छोड़ पहुंचे रायबरेली
Uttar Pradesh Lok Sabha Election: कांग्रेस के सामने आई कई मुसीबतों के वक्त उसके लिए चाणक्य की भूमिका निभाने वाले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार रायबरेली पहुंच चुके हैं। डीके शिवकुमार कांग्रेस पार्टी और खासकर गांधी परिवार के लिए कई मौकों पर संकेटमोचक साबित हो चुके हैं।
गुजरात से लेकर हैदराबाद तक या बेंगलुरु से लेकर शिमला तक कांग्रेस और गांधी परिवार के सामने जब भी सियासी चुनौतियां खड़ी हुई है, डीके शिवकुमार उनके लिए एक ढाल बनकर सामने आए हैं। अपने दमखम और रसूख की बदौलत उन्होंने पार्टी और उसकी फर्स्ट फैमिली को बाहर निकालकर दिखाया है।

रायबरेली में राहुल गांधी के प्रचार के लिए पहुंचे कांग्रेस के 'चाणक्य'
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इस बार अपनी मां सोनिया गांधी की छोड़ी हुई लोकसभा सीट रायबरेली से भी चुनाव लड़ रहे हैं। वह केरल के वायनाड सीट से इस बार भी उम्मीदवार हैं और वहां मतदान हो जाने के बाद नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन उन्होंने रायबरेली से अपनी उम्मीदवारी घोषित की है।
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष ने मीडिया वालों से मंगलवार को कहा, 'मैं उत्तर प्रदेश में चुनाव अभियान के सिलसिले में रायबरेली जा रहा हूं। मैं यहां (बेंगलुरु) दो दिनों तक नहीं रहूंगा, मैं आज ही जा रहा हूं।'
बर्थडे छोड़कर बेंगलुरु से रायबरेली पहुंचे शिवकुमार
इसके साथ ही शिवकुमार ने आज यानी 15 मई, 2024 को अपना बर्थडे नहीं मनाने का भी ऐलान किया है। वे बोले, 'मैंने अनुरोध किया है कि किसी को मेरा बर्थडे (15 मई) मनाने के लिए (मेरे आवास पर) नहीं आना चाहिए और किसी भी तरह का उत्सव नहीं होना चाहिए।'
कांग्रेस की गढ़ ही बनी हुई है राहुल गांधी के लिए चुनौती
रायबरेली लोकसभा सीट कांग्रेस की गढ़ मानी जाती है। राहुल गांधी की मां से पहले उनके दादा फिरोज गांधी, दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इस चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। लेकिन, पिछले कुछ चुनावों से यहां सोनिया गांधी का प्रदर्शन लगातार फीका होता जा रहा था। उनके राज्यसभा में जाने की भी यह एक बहुत बड़ी वजह मानी जा रही है।
अमेठी वाली गलती रायबरेली में नहीं दोहरा चाहती है कांग्रेस
ऐसे में राहुल के चुनाव प्रचार के लिए डीके शिवकुमार के पहुंचने के मायने समझे जा सकते हैं कि पार्टी किसी भी सूरत में रायबरेली में बीजेपी को अब कमजोर समझने की गलती नहीं करना चाहती। कभी अमेठी भी इसी तरह से परिवार का गढ़ थी, लेकिन इस बार परिवार को वहां से बोरिया-बिस्तर भी समेटना पड़ चुका है।
शिवकुमार सोनिया के खास नेता की जीत कर चुके हैं सुनिश्चित
जहां तक डीके शिवकुमार का कांग्रेस के लिए काम आने का ट्रैक रिकॉर्ड है तो यह सोनिया गांधी के बेहद खास रहे उनके राजनीतिक सचिव दिवंगत अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव के दिनों से देखा जा सकता है। शिवकुमार ने अपने दम पर न सिर्फ गुजरात के कांग्रेसी विधायकों को बेंगलुरु में अपने फार्म हाउस में मतदान के दिन तक घेरे रखने में सफलता पाई, बल्कि पटेल की जीत सुनिश्चित करके ही दम लिया।
डीके तेलंगाना और हिमाचल में भी दिखा चुके हैं दम
इसी तरह पिछले साल नवंबर में हुए तेलंगाना विधानसभा चुनावों में जब कुछ एग्जिट पोल में राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की अटकलें लगाई गईं तो भी कांग्रेस आलाकमान ने अपने विधायकों के कुनबे को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी देकर कर्नाटक के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को हैदराबाद में तैनात कर दिया।
इस साल फरवरी में इसी तरह जब हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस विधायकों की बगावत की वजह से कांग्रेस के राज्यसभा के आधिकारिक प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी चुनाव हार गए और सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार संकट में नजर आई तो फिर से उन्हें शिमला भेज दिया गया। इसके बाद कांग्रेस की सरकार वहां तात्कालिक संकट से उबर आई।
रायबरेली में पांचवें चरण में 20 मई को मतदान है। वैसे शिवकुमार ने बर्थडे नहीं मनाने की वजह राज्य में गंभीर सूखे की स्थिति को बताया है।












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