खनन घोटाला: IAS चंद्रकला के खिलाफ FIR दर्ज, अखिलेश यादव तक पहुंची जांच की आंच
लखनऊ। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने समाजवादी पार्टी सरकार में हुए खनन घोटाले में शनिवार को आईएएस बी. चंद्रकला के लखनऊ स्थित आवास और हमीरपुर, कानपुर समेत प्रदेश भर में 14 ठिकानों में छापेमारी की। इस मामले बी. चंद्रकला समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं इस मामले की आंच अखिलेश यादव तक पहुंचती दिख रही है। दरअसल 2012 और 2013 में खनन मंत्रालय तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास था।

बी. चंद्रकला के लॉकर और खाते सीज
इस मामले में शनिवार को हुए छापेमारी में बी. चंद्रकला के लखनऊ स्थित आवास समेत प्रदेशभर में 14 स्थानों पर सीबीआई ने रेड मारी है। अवैध खनन केस में सीबीआई ने चंद्रकला का एक लॉकर और 2 बैंक अकाउंट सीज कर दिए हैं। वहीं इस मामले में आदिल खान, बी चंद्रकला और तत्कालीन माइनिंग ऑफिस मोइनुद्दीन, समाजवादी पार्टी के विधान पार्षद रमेश मिश्रा समेत 11 लोगों को सीबीआई ने आरोपी बनाया है। साथ ही कई खनन ठेकेदारों और मौरंग व्यापारियों के घरों पर भी छापे मारे गए हैं।

अवैध खनन केस की आंच पूर्व सीएम अखिलेश यादव तक पहुंची
मीडिया रिपोर्ट के मुताबित, अवैध खनन केस की आंच पूर्व सीएम अखिलेश यादव तक पहुंचती दिख रही है। बताा जा रहा है कि, अखिलेश यादव सीबीआई की रडार पर हैं। एजेंसी कभी भी उनसे पूछताछ कर सकती है। सीबीआई ने हाईकोर्ट के आदेश पर सपा सरकार में हुए खनन घोटाले की जांच शुरू की थी। इस मामले में सीबीआई ने पांच एफआईआर दर्ज की थीं। इसमें मुख्य रूप से बांदा, हमीरपुर, बुलंदशहर आदि जिलों में दिए गए खनन के पट्टों की जांच की जा रही थी। सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि कई जिलों में मनमाने ढंग से खनन के पट्टे दिए गए।

सीबीआई को मिले महत्वपूर्ण दस्तावेज
बताया जा रहा है इस दौरान सीबीआई को कुछ महत्तवपूर्ण दस्तावेजों की भी तलाश है। जिसके बाद कहा जा रहा है कि बी. चंद्रकला को कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। बता दें, बी चन्द्रकला के घर से बरामद कागजातों में माइनिंग और टेंडर के दस्तावेजों में ओवरराइटिंग मिली है। सीबीआई ने बरामद हुए सभी कागजात को जब्त किया है। साथ ही बी चंद्र कला से दिल्ली में सीबीआई टीम पूछताछ भी कर रही है। सूत्रों से आ रही जानकारी के अनुसार सीबीआई खनन घोटाले में 2011 के बाद यूपी के सभी खनन मंत्रियों से पूछताछ कर सकती है। 2012-13 में खनन मंत्रालय तब सीएम अखिलेश यादव के पास था। ऐसे में संभव है कि सीबीआई की पूछताछ के दायरे में पूर्व मुख्यमंत्री भी आएं।












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