50,000 जमीन कार्यकर्ताओं ने बताया यूपी में क्यों हारी बीजेपी! विपक्ष के 'झूठे' दावे वाली दलीलों को किया खारिज?
UP News: यूपी बीजेपी लोकसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शनों को लेकर व्यापक पड़ताल कर रही है। इसके लिए कम से कम 50,000 जमीनी कार्यकताओं से मिले फीडबैक का विश्लेषण किया जा रहा है। इस फीडबैक में कार्यकर्ताओं ने आमतौर पर पार्टी की हार के लिए आंतरिक कारणों को ही ज्यादा जिम्मेदार बताया है।
यूपी में भाजपा सांसदों की संख्या 2019 के 62 से घटकर 2024 में 33 रह गई है, जो लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पार्टी को मंथन करने को मजबूर कर रहा है। इस मुद्दे पर प्रदेश बीजेपी के शीर्ष नेताओं में मतभेद भी देखने को मिल रहे हैं।

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हार की कई वजहों की ओर किया इशारा
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि कार्यकर्ताओं से जो आंकड़े जुटाए गए हैं, वह प्रदेश में भाजपा की हार को लेकर किसी एक वजह की ओर इशारा नहीं कर रहे हैं।
इनमें से जो ज्यादातर फीडबैक मिले हैं, उनमें बीजेपी के खराब प्रदर्शन की वजहों में 'उम्मीदवारों का चुनाव', 'कार्यकर्ताओं की उदासीनता' और बहुत ही ज्यादा 'आत्मविश्वास' को सबसे बड़ा कसूरवार माना गया है। इसके अलावा पार्टी में बाहरी लोगों के बढ़ते प्रभाव की ओर भी इशारा किया गया है, जो कार्यकर्ताओं की निराशा की बड़ी वजह हो सकती है।
वैसे तथ्य यह है कि इसी महीने लखनऊ में पार्टी कार्यसमिति की बैठक में मुखयमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अति आत्मविश्वास को पार्टी के उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने की वजह बताया था।
हार की जिम्मेदारी लें नेता, इसी की ओर कार्यकर्ताओं का इशारा!
बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, 'पार्टी में जब अच्छा हो रहा था तो बड़े नेता सामूहिक तौर पर उसका क्रेडिट ले रहे थे। इसलिए हार की जिम्मेदारी भी सामूहिक होनी चाहिए। कार्यकर्ताओं का फीडबैक इसी बात की ओर इशारा कर रहा है।'
इंडिया ब्लॉक के 'गलत' दावे और 'झूठे' वादों को बताया जा रहा था हार की वजह
बता दें कि बीजेपी से लेकर उसके सहयोगी दलों और पटना से लेकर मुंबई तक पार्टी और एनडीए नेताओं की ओर से 400 पार के नारे की नाकामी के लिए विपक्षी इंडिया ब्लॉक के 'झूठे' वादे और संविधान और आरक्षण को लेकर 'गलत' दावे को अपनी उम्मीदों से खराब प्रदर्शन की वजह बता रहे थे।
14 जुलाई को भाजपा की यूपी में जो कार्यसमिति की एक बैठक हुई थी उसमें भी पार्टी की ओर से यूपी में आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाने को लेकर एक प्रस्ताव पास किया गया था। इसके मुताबिक यूपी में पार्टी आरक्षण खत्म करने और संविधान बदलने वाले विपक्ष के झूठे प्रोपेगेंडा की वजह से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी।
इसी तरह से हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ लड़ीं भाजपा की माधवी लता ने कहा था, 'हमें अपने प्यारे मतदाताओं की कुर्बानी देनी पड़ी, क्योंकि सामान्य लोगों, गरीबों, देश के सर्व साधारण तक गलत आरोप, गलत जानकारियां और गलत संवाद पहुंचाए गए।'
बीजेपी के सहयोगी भी लगा चुके हैं ऐसे ही आरोप
वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने कहा था, 'महाराष्ट्र समेत कुछ जगहों पर हमें इसलिए नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि हमारे खिलाफ गलत कहानियां गढ़ी गईं। गलत कहानियां जैसे कि संविधान बदल दिया जाएगा, आरक्षण नहीं रहेगा आदि...यह हमारे खिलाफ गया....'
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