संयुक्त राष्ट्र ने उत्तराखंड हादसे पर व्यक्त की संवेदना, भारत को हरसंभव मदद का दिया भरोसा
संयुक्त राष्ट्र ने रविवार को एक बयान जारी कर उत्तराखंड में हिमस्खलन की चपेट में आने से आई भारी बाढ़ के मद्देनजर भारत को मदद देने की पेशकश की है।
उत्तराखंड: संयुक्त राष्ट्र ने रविवार को एक बयान जारी कर उत्तराखंड में हिमस्खलन की चपेट में आने से आई भारी बाढ़ के मद्देनजर भारत को मदद देने की पेशकश की है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने कहा कि रविवार को भारत के उत्तराखंड राज्य में ग्लेशियर फटने और बाद में बाढ़ आने के कारण जान माल की हानि और दर्जनों लोगों के लापता होने का उन्हें गहरा दुख है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के एक बयान में कहा कि महासचिव ने पीड़ितों के परिवारों और भारत सरकार और लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।

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उन्होंने आगे कहा, "यदि आवश्यक हो तो संयुक्त राष्ट्र निरंतर बचाव और सहायता प्रयासों में योगदान करने के लिए तैयार है।" बता दें कि संयुक्त राष्ट्र का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड चमोली जिले में नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद बाढ़ से जूझ रहा है। इस हादसे में अभी तक 10 लोगों के मारे जाने की खबर है जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं, जिन्हें खोजने के लिये तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
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खबर के मुताबिक लापता लोगों में ज्यादातर वे मजदूर थे जो वहां चल रहे एनटीपीसी के दो प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। तपोवन विष्णुगढ़ हाइडिल प्रोजेक्ट और ऋषि गंगा हाइडिल प्रोजेक्ट पर काम करते वक्त यह हादसा हुआ और वहां काम कर रहे मजदूर अचानक आई बाढ़ में बह गये। इस भयानक हादसे में उत्तराखंड को जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।
उत्तराखंड में चलाए जा रहे पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो गये। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने घायलों और मृत लोगों के परिवारजनों को आर्थिक मदद देने का भी ऐलान किया है।












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