वैक्सीन की कमी के सवाल पर भड़के केंद्रीय मंत्री, बोले-क्या हम खुद को फांसी पर लटका लें?
बेंगलुरु, मई 13: कोरोना महामारी के बीच देश में कोरोना वैक्सीन की कमी के चलते टीकाकरण की रफ्तार धीमी हो गई है। वैक्सीन कमी को लेकर लोग लगातार मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। केंद्रीय केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने गुरुवार को महामारी को लेकर अदालती आदेशों पर तल्ख टिप्पणी की है। डीवी सदानंद गौड़ा ने बृहस्पतिवार को पूछा कि अगर सरकार ने जैसा निर्देश दिया है, उतनी वैक्सीन नहीं प्रोड्यूस कर पाए तो क्या खुद को फांसी पर लटका लें?

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मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि, अदालत ने अच्छी मंशा से कहा है कि देश में सबको टीका लगवाना चाहिए। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि अगर अदालत कल कहती है कि आपको इतने (टीके) देने हैं और यह अगर न बन पाए, तो क्या हमें खुद को फांसी पर लटका लेना चाहिए ? टीके की किल्लत के सवालों पर केंद्रीय मंत्री ने सरकार की कार्रवाई योजना पर जोर दिया और कहा कि इसके निर्णय किसी भी राजनीतिक लाभ या किसी अन्य कारण से निर्देशित नहीं होते हैं।
उन्होंने कहा कि, सरकार अपना काम पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करती आ रही है और उस दौरान कुछ कमियां सामने आई हैं। मंत्री ने जानना चाहा, 'व्यावहारिक रूप से, कुछ चीजें जो हमारे नियंत्रण से परे हैं, क्या हम उसका प्रबंधन कर सकते हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ काम कर रही है कि एक या दो दिन में चीजें सुधरें और लोगों को टीका लगे।
केंद्रीय मंत्री के साथ मौजूद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने दावा किया कि अगर व्यवस्था समय पर नहीं की जाती तो चीज़ें बदतर हो सकती थी। रवि ने कहा, यदि पहले से उचित व्यवस्था नहीं की गई होती तो मौतें 10 गुना या 100 गुना ज्यादा होतीं। रवि ने कहा, लेकिन कोरोनावायरस के अकल्पनीय प्रसार के कारण हमारी तैयारी विफल रही। अदालतों द्वारा कोरोनावायरस के मुद्दे पर सरकार की खिंचाई करने पर रवि ने कहा, न्यायाधीश सब कुछ जानने वाले नहीं होते हैं। हमारे पास जो कुछ भी उपलब्ध है, उसके आधार पर तकनीकी सलाहकार समिति यह सिफारिश करेगी कि कितना (टीकों का) वितरण किया जाना है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर हम निर्णय करेंगे।












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