92 साल पुरानी परंपरा खत्म, अब अलग से पेश नहीं होगा रेल बजट
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बड़ा फैसला लेते हुए रेल बजट को आम बजट में शामिल करने को मंजूरी दे दी है, यानी वित्त वर्ष 2017-18 के लिए रेल बजट और आम बजट अब अलग-अलग पेश नहीं होगा।

अब अलग से पेश नहीं होगा रेल बजट
केंद्रीय कैबिनेट के इस फैसले के बाद 92 साल से चली आ रही वो परंपरा बंद हो जाएगी जिसमें रेल बजट को अलग से पेश किया जाता था।
केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को दिल्ली में बैठक हुई जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा की गई। जिसके बाद फैसला लिया गया कि वित्त वर्ष 2017-18 के लिए रेल और आम बजट को एक साथ पेश किया जाएगा।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि इस साल एक बजट पेश होगा और ये विनियोजन विधेयक होगा। सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि हर साल रेलवे पर चर्चा की जाए।
92 साल पुरानी परंपरा हो जाएगी बंद
रेल बजट को अलग से पेश भले नहीं किया जाए लेकिन इसका अलग रुतबा बरकरार रहेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि इसकी कार्यात्मक स्वायत्तता को बनाए रखा जाएगा।
ये अलग संस्था के तौर पर काम करेगी। इसमें कामकाज को लेकर पहले जैसी ही स्वतंत्रता बनी रहेगी।
बता दें कि रेलवे के देश में सबसे ज्यादा कर्मचारी हैं। जिसके चलते 7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद 40 हजार करोड़ का अतिरिक्त सालाना खर्च के अलावा यात्री सेवा के लिए सब्सिडी पर 33,000 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है।












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