आम बजट 2014: नरेंद्र मोदी से मध्यम वर्ग की क्या उम्मीदें हैं?

वित्त मंत्रालय के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मोदी की सरकार सैलरी क्लास लोगों को लुभाने की कोशिश करती है तो उन्हें निश्चित ही टैक्स भुगतान करने के नियमों को सुधारना होगा। एक मध्यम वर्गीय परिवार का व्यक्ति यदि कहीं बाहर खाना खाने जाता है तो और यदि उसका बिल 1000 रुपए आता है तो भी उसे अप्रत्यक्ष टैक्स जोड़कर करीब 1200 रुपए का भुगतान करता होता है।
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मध्यम वर्ग की नरेंद्र मोदी से उम्मीदें:
मध्यम वर्ग हमेशा से यही चाहता है कि उसे बिना वजह और बिना किसी बात के टैक्स न देना पड़े। सैलरी क्लास लोग यही चाहते हैं कि जिस वस्तु की कीमत जितनी है उतने ही रुपए का भुगतान किया जाए न कि टैक्स भी। यहां कुछ ऐसी प्रमुख बातें हैं जिन्हें मध्यम वर्ग आम बजट में चाहता है और इसलिए ही मोदी को वोट भी दिया:
1. 2-5 लाख रुपए तक की कमाई वालों से कोई कर नहीं वसूला जाना चाहिए।
2. 5 लाख रुपए से ऊपर की कमाई करने वाले लोगों से ही टैक्स की वसूली करनी चाहिए। एक सैलरी क्लास व्यक्ति चाहता है कि 5-10 लाख रुपए कमाने वालों से 5 प्रतिशत, 10-15 लाख रुपए वालों से 10 प्रतिशत और 15-20 लाख रुपए वालों से 15 प्रतिशत का कर वसूला जाना चाहिए।
3. 1.5 लाख रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक की राशि के लिए कोई आवास ऋण नहीं वसूला जाना चाहिए।
4. विभिन्न प्रकार से टैक्सों का भुगतान किए जाने के कारण मेहनत का अाधा पैसा सरकार काट लेती है लेकिन यदि अप्रत्यक्ष रूप से वसूले जाने वाले टैक्स जैसे सेल्स टैक्स, सर्विस टैक्स और वैट को हटा दिया जाए तो इससे बड़ी खबर मध्यम वर्ग के लिए कोई और नहीं हो सकती है।
5. मोदी सरकार बैंक ट्रांसेक्शन टैक्स को पहली बार आम बजट में पेश कर सकती है। इस टैक्स के जरिए आम आदमी को ज्यादा टैक्स भी नहीं देना होगा और उसकी नेट सैलरी भी बढ़ जाएगी।












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