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Uniform Civil Code: निकाह, तलाक, वसीयत और पुनर्विवाह जैसे 7 सवाल, 25 राज्यों की मुस्लिम महिलाओं ने दिए जवाब

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) पर विवाद के बीच एक सर्वेक्षण में मुस्लिम महिलाओं की राय जानने के लिए सर्वे में देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 8,035 मुस्लिम महिलाओं से बात की गई। यह समझने का प्रयास किया गया कि महिलाएं यूसीसी के मुद्दों पर क्या सोचती हैं।

फिलहाल, यूसीसी का ड्राफ्ट सामने नहीं आया है, लेकिन इसमें शामिल किए जाने वाले बिंदुओं पर अटकलें लगाई जा रही हैं। प्रस्तावित विधेयक में किन सामाजिक-कानूनी बिंदुओं को संबोधित किया जा सकता है? इन संभावनाओं पर न्यूज18 नेटवर्क के सर्वेक्षण में कई सवाल पूछे गए।

Uniform civil code

महिलाओं से पूछे गए सात प्रमुख प्रश्नों में यूसीसी का कोई उल्लेख नहीं किया गया। हालांकि, सवाल ऐसे डिजाइन किए गए जिससे दायरा केवल उन विषयों तक ही सीमित रहे जिन्हें यूसीसी कथित तौर पर UCC के तहत कवर किए जाने की संभावना है।

दरअसल, जब से प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक घर में दो कानून क्यों और कैसे? का जिक्र किया। इसके बाद से यूसीसी लगातार चर्चा में है। आम जनमानस में इस कानून का मतलब एक ऐसा कानून है जिसमें विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने जैसे मुद्दों पर कानून बनाया जाएगा। धारणा है कि UCC सभी धार्मिक समुदायों पर लागू होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि भारत को यूसीसी की जरूरत है, क्योंकि देश "अलग-अलग समुदायों के लिए अलग कानून" की दोहरी प्रणाली के साथ नहीं चल सकता है। उत्तराखंड सरकार ने भी UCC कानून की पहल के साथ मसौदा तैयार किया है।

उत्तराखंड सरकार के प्रस्ताव में विवाह के लिए लड़कियों की उम्र, लिव इन रिलेशन के लिए प्रावधान का जिक्र है। सरकार का कहना है कि मसौदा तैयार है और विधानसभा में विधेयक को मंजूरी और गवर्नर की संस्तुति के बाद जल्द ही कानून लागू किया जाएगा।

इन गतिविधियों के बीच एक सर्वे में मुसलमान क्यों? महिलाएं क्यों? जैसे सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश हुई। जब केंद्र सरकार ने हाल ही में घोषणा कि विधि आयोग यूसीसी पर नए सिरे से परामर्श करेगा, तो मुस्लिम संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने विधि आयोग से कहा, "बहुसंख्यकवादी नैतिकता" को एक कोड के नाम पर अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता और अधिकारों पर हावी नहीं होना चाहिए।

AIMPLB पूरे समुदाय का प्रतिनिधि होने का दावा करता है। न्यूज18 नेटवर्क के सर्वे में यह पड़ताल की गई कि क्या महिलाएं भी AIMPLB की राय से इत्तेफाक रखती हैं? ऐसा इसलिए क्योंकि कानून बनने या न बनने की स्थिति में सबसे अधिक प्रभावित होने वाली संख्या महिलाओं की भी होगी।

सर्वे में महिलाओं से कैसे संपर्क किया गया

यूसीसी के बारे में न्यूज-18 की रिपोर्ट के अनुसार, ऑन-ग्राउंड सर्वेक्षण में भारत के अलग-अलग शहरों में 884 पत्रकारों ने 4 से 8 जुलाई के बीच कई राज्यों की महिलाओं की प्रतिक्रियाएं रिकॉर्ड कीं। सर्वेक्षण में विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों, शैक्षिक और वैवाहिक स्थिति वाली 8,035 मुस्लिम महिलाओं ने भाग लिया।

18 साल से 65 साल से अधिक आयु वर्ग की महिलाओं में निरक्षर से लेकर पीजी तक पढ़ाई कर चुकी महिलाओं ने भी यूसीसी पर अपनी राय बताई। 16 प्रश्नों के जवाब देने के लिए महिलाओं को अपना नाम बताना अनिवार्य नहीं था। इसके बावजूद 90% ने बेहिचक अपने नाम बताए।

16 सवालों में सात प्रमुख प्रश्नों के जवाब महिलाओं ने दिए, जिससे अंदाजा होता है कि क्या मुस्लिम महिलाएं UCC कानून पर क्या सोचती हैं। एक नजर सर्वे में पूछे गए सवालों पर-

  1. क्या आप विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए सभी भारतीयों के लिए एक समान कानून का समर्थन करते हैं?
  2. क्या आपको लगता है कि मुस्लिम पुरुषों को चार महिलाओं से शादी करने का अधिकार होना चाहिए?
  3. क्या सभी पुरुषों और सभी महिलाओं को संपत्ति के उत्तराधिकार और उत्तराधिकार का समान अधिकार होना चाहिए?
  4. क्या तलाकशुदा जोड़ों को बिना किसी प्रतिबंध के पुनर्विवाह की अनुमति दी जानी चाहिए?
  5. क्या धर्म की परवाह किए बिना गोद लेने की अनुमति दी जानी चाहिए?
  6. क्या सभी भारतीय वयस्कों को अपनी संपत्ति अपनी इच्छानुसार वसीयत करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए?
  7. क्या आप सभी पुरुषों और महिलाओं के लिए विवाह की कानूनी उम्र 21 वर्ष का समर्थन करते हैं?

किन राज्यों की महिलाओं ने दिए जवाब

सर्वेक्षण में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लद्दाख, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की महिलाओं को शामिल किया गया।

सवालों के जवाब में भाषाई विविधता भी दिखी। असमिया, बंगाली, बोडो, अंग्रेजी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, उर्दू भाषाओं में जवाब दिए गए।

सर्वेक्षण में 18-24 आयु वर्ग की 18.8% महिलाओं ने भाग लिया। 32.9% महिलाओं की आयु 25-34 साल के बीच है। 26.6 फीसद महिलाएं 35-44 आयु वर्ग की हैं। 14.4 प्रतिशत महिलाओं की आयु 45-54 साल के बीच, जबकि 5.4 फीसद महिलाओं की आयु 55-64 साल रही।

65 साल से अधिक आयु की 1.9% महिलाओं ने भी सर्वे में भाग लिया। 70.3% विवाहित महिलाएं, 24.1% अविवाहित थे, 2.9% विधवा थे और 2.9% तलाकशुदा महिलाओं ने सवालों के जवाब दिए। कुल 8,035 मुस्लिम महिलाओं में 73.1% सुन्नी, 13.3% शिया और 13.6% अन्य समुदाय से जुड़ी हैं।

सर्वेक्षण में शामिल लगभग 867 (10.8%) महिलाओं के पास स्नातकोत्तर डिग्री, जबकि 2169 महिलाएं (27%) ग्रैजुएट थीं। 20.8 फीसद महिलाएं कक्षा 12 या उससे आगे लेकिन ग्रैजुएशन से कम पढ़ाई की। 13.8% यानी करीब 1108 महिलाओं ने कक्षा 10वीं या इससे अधिक, लेकिन 12वीं से कम पढ़ाई की।

यूसीसी पर सर्वे में शामिल 8,035 महिलाओं में 12.9% को सिर्फ कक्षा 5वीं से 10वीं के बीच की पढ़ाई का मौका मिला। 4.4% ऐसी महिलाएं भी रहीं जिन्हें केवल कक्षा 5वीं तक पढ़ाई का मौका मिला। 4.2% फीसद निरक्षर और 4.2% के पास बुनियादी साक्षरता वाली महिलाओं ने भी यूसीसी से जुड़े सवालों के जवाब दिए। 1.9% अन्य शैक्षणिक बैकग्राउंड वाली महिलाएं भी सर्वे में शामिल हुईं।

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