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ग्रेजुएट लोगों में बेरोजगारी दर ने छुआ 13.2 फीसदी का आंकड़ा-CMIE

नई दिल्ली: सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के एक नए विश्लेषण के मुताबिक स्नातक या स्नाक से ऊपर उच्च शिक्षा पूरी करने वालों में बेरोजगा दर साल 2017 के बीच से लगातार बढ़ रही है। CMIE के एमडी और सीईओ महेश व्यास द्वारा लिखे गए एक आर्टिकल में बताया गया है कि सितंबर-दिसंबर 2018 के दौरान उच्च शिक्षा लेने वालों में बेरोजगारी दर ने 13.2 फीसदी का आंकड़ा छू लिया, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 12.1 फीसदी थी। इस आर्टिकल में आगे लिखा गया है कि उच्च बेरोजगारी दर ये संकेत देती है कि भारत ग्रेजुएट लोगों के लिए पर्याप्त नौकरियों का उत्पादन नहीं करता है। यह भारत की रोजगार समस्या की त्रासदी है।

ग्रेजुएट या उच्च शिक्षा पाने वालों में बेरोजगारी ज्यादा

ग्रेजुएट या उच्च शिक्षा पाने वालों में बेरोजगारी ज्यादा

CMIE के अनुसार ग्रेजुएट और उससे ज्यादा शिक्षा प्राप्त लोगों का समूह सबसे अधिक बेरोजगारी दर का सामना करता है। यह आमतौर पर पूरे श्रम बल के लिए औसत बेरोजगारी दर से दोगुना है। स्नातक और उससे ज्यादा शिक्षित महिलाओं के मामले में यह और भी खराब है। इस स्टडी में ये सामने आया है कि इसका सबसे बड़ा असुविधाजनक कारक यह है कि बेरोजगारी का स्तर आनुपातिक रूप से बढ़ता है क्योंकि उन लोगों के बीच शिक्षा का स्तर बढ़ता है।

पांच समूहों पर आधारित सर्वेक्षण

पांच समूहों पर आधारित सर्वेक्षण

ये स्टडी शिक्षा के अधिकतम स्तर के आधार पर व्यक्तियों के पांच समूहों के सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें बिना शिक्षा प्राप्त करने वाले, पांचवीं कक्षा तक के शिक्षा वाले, छठी और नौवीं कक्षा के बीच शिक्षा वाले; दसवीं, ग्यारहवीं या बारहवीं पास करने वालों और स्नातक स्तर की पढ़ाई या स्नातक स्तर से ऊपर पढ़ाई करने वाले लोग शामिल है। ये सर्वे बताता है कि औसत सितंबर से दिसंबर 2018 के बीच औसत बेरोजगारी दर 6.7 फीसदी थी। इसमें कहा गया है कि बिना पढ़े लोगों को बहुत अधिक बेरोजगारी का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि उनके लिए बेरोजगारी दर 0.8 फीसदी थी। गरीब लोगों के मामले में यह दर कम थी क्योंकि उन्हें कोई भी काम करना था, चाहे उसके लिए खराब भुगतान किया गया हो या फिर वो कितना भी जोखिम भरा हो। केवल पाँचवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त करने वालों को भी 1.3 फीसदी बेरोजगारी दर का सामना करना पड़ा ,जो बहुत कम है। वहीं छठवीं से नौवीं पास लोगों में ये बढ़कर 4.6 फीसदी हो गई। वहीं 10 वीं और 12 वीं पास लोगों के लिए ये बढ़कर 10.6 फीसदी पर थी। वहीं ग्रजेुएट या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त करने वालों में ये बढ़कर 13.2 फीसदी हो गई।

भारत में श्रम भागेदारी बहुत कम

भारत में श्रम भागेदारी बहुत कम

CMIE की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में करीब 43 फीसदी श्रम भागेदारी दर है,जो बहुत कम है। इस रिपोर्ट में शिक्षा स्तर के अनुसार भारत में श्रम भागीदारी दरों पर भी प्रकाश डाला गया है। आमतौर पर शिक्षा सामान्य है और विशेष रूप से कॉलेज की शिक्षा श्रम भागीदारी के लिए अच्छी है। दसवीं कक्षा से कम शिक्षित लोगों के लिए श्रम भागीदारी दर 40 प्रतिशत से कम है। दसवीं से बारहवीं कक्षा की शिक्षा वाले लोगों के लिए यह 43 प्रतिशत तक बेहतर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्नातक + उससे ऊपर समूह के लिए 61 प्रतिशत तक होती है। रिपोर्ट में महिला स्नातकों के बीच श्रम भागीदारी का भी विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉलेज की शिक्षा महिलाओं में बड़ा अंतर डालती है।सितंबर-दिसंबर 2018 के दौरान कुल महिला श्रम भागीदारी 11.1 प्रतिशत थी, लेकिन स्नातक या उससे ऊपर शिक्षित महिलाओं के लिए भागीदारी 22.6 प्रतिशत से अधिक थी।

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