सड़क दुर्घटना में पत्नी को खो चुके बेरोजगार शख्स को मिलेंगे एक करोड़

साल 2008 में एक रोज अनाघा नामक महिला अपने पति विवेक के साथ बाइक पर ऑफिस जा रही थीं। मुंबई में अंधेरी फ्लाई ओवर के पास बाइक की भिड़ंत ट्रक से हो गई और अनाघा की मौत हो गई।

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    Mumbai man gets compensation of Rs 1 crore after his wife dies in road accident | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। सड़क दुर्घटना में पत्नी को खो चुके शख्स को मोटर ऐक्सिडेंट्स क्लेम्स ट्राइब्यूनल से बड़ी जीत मिली है। ट्राइब्यूनल ने बीमा कंपनी को इस शख्स को एक करोड़ रुपये देने का आदेश दिया है। पति को ये जीत 9 साल की लंबी लड़ाई के बाद मिली है। पति का कहना था कि वह आर्थिक रूप से अपनी पत्नी पर निर्भर था। ऐसे में बीवी की मौत के बाद उसे आर्थिक संकट से जूझना पड़ा और उसे क्लेम की रकम मिलनी चाहिए।

    2008 में हुई थी पत्नी की हादसे में मौत

    2008 में हुई थी पत्नी की हादसे में मौत

    साल 2008 में एक रोज अनाघा नामक महिला अपने पति विवेक के साथ बाइक पर ऑफिस जा रही थीं। मुंबई में अंधेरी फ्लाई ओवर के पास बाइक की भिड़ंत ट्रक से हो गई और अनाघा की मौत हो गई। उस वक्त 26 वर्षीय विवेक बेरोजगार था। इस मामले में विवेक ने कोर्ट में मुआवजे के लिए क्लेम किया। विवेक ने दलील दी कि उसकी पत्नी परिवार की इकलौती कमाने वाली सदस्य थी।

     जांच में ड्राइवर की गलती पाई गई

    जांच में ड्राइवर की गलती पाई गई

    जांच में पता चला कि इस घटना में ट्रक ड्राइवर बाबूराम अग्रवाल की गलती थी जो गलत ड्राइविंग कर रहा था। उसने अनाघा को टक्कर मारी, जिसकी मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गई।शुरुआत में वीइकल ओनर ऐंड न्यू इंडिया बीमा कंपनी लिमिटेड ने विवेक की शिकायत को खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि यह शिकायत झूठी है। ट्राइब्यूनल ने इस मामले में पति से बात की। पुलिस की छानबीन को देखा और परखा। इसके बाद कई कागजात देखे। इसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि महिला की मौत ट्रक चालक की गलती की वजह से हुई थी।

    मृतका के इनकम को आधार बनाया गया

    मृतका के इनकम को आधार बनाया गया

    इस मामले में मृतका की इनकम को आधार बनाया गया। वह अपनी कंपनी में नैशनल अकाउंट मैनेजर की पोस्ट पर प्रमोट हुई थी। इसके बाद उसकी सालाना इनकम 35 से 40 लाख रुपये हो गई थी। इसे देखते हुए पति की आर्थिक निर्भरता और बेरोजगारी देखते हुए एक करोड़ रुपये मुआवजा तय किया गया। इस मुकदमे को लड़ते-लड़ते विवेक की उम्र अब 37 साल हो गई है। आखिरकार ट्राइब्यूनल ने इस मामले में बीमा कंपनी को एक करोड़ रुपये देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह फैसला बिना लिंग भेद के आधार पर आर्थिक निर्भरता को देखते हुए सुनाया।

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