उमा भारती ने अपने 'संन्यास' को समझाया, कहा- मेरे ट्वीट को फिर से पढ़ने की जरूरत
Uma Bharti बीजेपी की फायर ब्रांड नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती किसी ना किसी वजह से चर्चाओं में रहती हैं। हाल ही में उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था कि वह अपने परिजनों का त्याग कर खुद को परिवार के बंधनों से मुक्त कर रहीं हैं। अब उन्हें 'दीदी मां' के नाम से जाना जाएगा। इसी के साथ उन्होंने आगामी 17 नवंबर को इसकी घोषणा के बारे में भी जानकारी दी थी। ऐसे में अब उमा भारती ने अपने 'संन्यास' को समझाते हुए बताया कि उन्हें सिर्फ 'दीदी मां' क्यों कहा जाएगा?

दरअसल, उमा भारती ने एक के बाद 9 ट्वीट कर काफी कुछ कहा था, जिसके बाद उन ट्वीट्स पर सफाई देते हुए अब उमा भारती ने लिखा कि, 'मेरे ट्वीट के बाद कुछ समाचार पत्रों एवं चैनलों ने मुझसे इस बारे में बात करने के लिए संपर्क किया। उससे मुझे लगा कि उनमें से कईयों ने मेरे ट्वीट ठीक से पढ़े नहीं हैं, मैं अनुरोध करती हूं कि आप सभी लोग उन ट्वीट को एक बार पढ़ लीजिए।'
बीजेपी नेता ने आगे लिखा कि मैं अमरकंटक में अब संन्यास नहीं लेने वाली और ना अब मेरा नाम बदलने वाला है, मैंने जो लिखा है उसको फिर से पढ़िए। मैं सारांश फिर से ट्वीट करती हूं-मैं 17 नवंबर 1992 को अमरकंटक में संन्यास ले चुकी हूं मेरा नाम उसी समय उमा भारती से उमाश्री भारती हो चुका है आपने मेरे घर बी-6, शामलाहिल्स, भोपाल में घुसते ही नेम प्लेट पर उमाश्री भारती ही लिखा हुआ देखा है। संन्यास दीक्षा के समय मेरा पार्लियामेंट में दूसरा टर्म था इसलिए चुनाव आयोग एवं संसदीय कार्य प्रणाली में तकनीकी तौर पर मैं अपना नाम नहीं बदलवा सकी।
उन्होंने बताया मेरे गुरुजी के बाद अब जैन मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज गुरु स्थान पर हैं उन्होंने मुझे आज्ञा दी कि मैं सबको हिदायत दूं कि मुझे संबंधों से संबोधित ना किया जाए 'दीदी मां' हूं। मेरे गुरु ने 30 साल पहले मुझे कहा था सारे विश्व के साथ अपने परिवार पर भी दया एवं करुणा रखना किंतु आसक्ति या मोह मत रखना, उसी बात को 30 साल बाद श्री विद्यासागर जी महाराज ने विस्तार दिया। भारती, भारत की है, सबकी 'दीदी मां' बन जाओ। फिर से मेरा मीडिया जगत से अनुरोध है फिर से मेरे ट्वीट पढ़ लीजिए। जिस परिवार में जन्मी मेरे भाइयों एवं भतीजे-भतीजियों ने मुझे राजनीति में बहुत बड़ा सहारा दिया कई बार तो अपनी जान दांव पर लगा दी, झूठे केस, प्रताड़नाऐं, कई परेशानियां भाजपा एवं कांग्रेस दोनों की सरकार के समय पर झेलीं।
सभी लोग अपने दम पर बहुत तरक्की कर रहे हैं लड़कियां बड़े-बड़े कालेजों में हैं भाइयों की बहुएं पायलट, वकील, डॉक्टर बनी हुई हैं,देश-विदेश में अपनी ख्याति के झंडे गाड़ रही हैं, 100/100 नंबर लेकर दिल्ली के बड़े-बड़े कॉलेजों में पढ़ रही हैं उन्हें हमेशा मेरे नाम एवं प्रतिष्ठा की फिक्र रहती है। मैं तो पूरे संसार से प्रेम करती हूं इसमें वह भी शामिल हैं, हां एक परिवार की इकाई के तौर पर कोई एक परिवार की जगह आप सब मेरे परिवार हो जाइए, अब मेरा परिवार भी मुझसे मुक्त होकर आगे बढ़े तथा मैं भी उनसे मुक्त होऊं एवं आप सब मेरा परिवार बन जाइए।












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