फर्जी विश्वविद्लायों पर क्यों नहीं लेती एक्शन यूजीसी
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) विश्व विद्लाय अनुदान आयोग यानी यूजीसी। यूजीसी के ऊपर दायित्व है कि वह देश के तमाम सरकारी विश्वविद्लायों के कामकाज से लेकर उनके पाठ्यक्रम वगैरह पर नजर रखे। उन फर्जी विश्वविद्लायों के खिलाफ एक्शन ले जो बच्चों के करियर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। क्या यूजीसी इस लिहाज से अपने काम को अंजाम दे रही है? कतई नहीं। वहां पर सरकारीपन पसरा हुआ है।

हालात पहले की तरह
राजधानी के आईटीओ इलाके के समीप इसके दफ्तर में जाने पर समझ आ जाता है कि यहां पर हालात पहले की तरह से बने हुए हैं। कोई सुधार नहीं है।
फ़र्ज़ी विश्वविद्यालयों की सूची
अब यूजीसी ने 21 फ़र्ज़ी विश्वविद्यालयों की सूची जारी की है। उसने चेताया कि वहाँ प्रवेश न लें। क्या ये काफी है? एक सामान्य इंसान को क्या पता कि कोई कालेज या विश्वविद्लाय सही है या फर्जी है। पर यूजीसी के बाबुओं को लगता है कि अपनी तरफ से अखबारों में छोटा सा विज्ञापन देने से उनकी जिम्मेदारी खत्म हो जाएगी। आप उत्तर प्रदेश,बिहार या मध्य प्रदेश की तो बात छोड़ दीजिए, राजधानी दिल्ली में भी बहुत से कथित और फर्जी विश्वविद्लाय चल रहे हैं।
फर्जी विश्वविद्लाय का विज्ञापन
सोमवार को ही एक फर्जी विश्वविद्लाय चलाने वाले ने एक बड़े अंग्रेजी अखबार के पहले पन्ने पर अपना विज्ञापन दिया था। क्यों नहीं यूजीसी इस तरह के शिक्षा और समाज के दुश्मनों के खिलाफ कदम उठाती? सवाल उठता है कि अगर कोई फ़र्ज़ी हैं तो अब तक खुली हुई क्यों हैं? बंद कौन करेगा। सवाल होना चाहिये कि खुली कैसे?












Click it and Unblock the Notifications