त्रिपुरा में फायदे का सौदा साबित हुआ कांग्रेस के लिए लेफ्ट के साथ गठबंधन, CPIM को बड़ा झटका
त्रिपुरा में कांग्रेस के साथ गठबंधन लेफ्ट के लिए साबित हुआ घाटे का सौदा। त्रिपुरा में वोट शेयर की बात करें तो सर्वाधिक वोट भारतीय जनता पार्टी को 39 फीसदी मिला है। वहीं सीपीआईएम को 24.6 फीसदी वोट मिला है।

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में जिस तरह से लेफ्ट के वोट शेयर में गिरावट हुई है उसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या कांग्रेस के साथ सीपीआईएम का गठबंधन करना सही था। त्रिपुरा में सीपीआई (एम) का वोट शेयर इस चुनाव में काफी घटा है। 2018 के चुनाव की बात करें तो सीपीआईएम को 42 फीसदी वोट मिले थे, जबकि इस चुनाव में सिर्फ 24.6 फीसदी वोट मिले हैं। यही नहीं पार्टी को इस बार सिर्फ 11 सीटों पर जीत मिली है जबकि 2018 में 16 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं कांग्रेस के वोट शेयर की बात करें तो 2018 की तुलना में कांग्रेस का वोट शेयर 1.8 फीसदी से बढ़कर 8.6 फीसदी पहुंच गया है। यही नहीं पिछले चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी, जबकि इस चुनाव में कांग्रेस को 3 सीटों पर जीत मिली है।
लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि दोनों ही दलों के बीच यह गठबंधन इसलिए नहीं हुआ था कि दोनों एक दूसरे के वोट शेयर को ट्रांसफर करेंगे, बल्कि इसलिए यह गठबंधन किया गया कि नीचे से दबाव था। लोगों की मांग थी कि जिसकी वजह से गठबंधन किया गया। लेकिन कांग्रेस और लेफ्ट के बीच इस गठबंधन ने एक बड़ा सवाल यह जरूर खड़ा किया है कि गठबंधन में लेफ्ट के वोट शेयर कांग्रेस के खाते में जरूर जाते हैं लेकिन कांग्रेस का वोट शेयर लेफ्ट के पास नहीं आता है। यही वजह है कि आने वाले समय में कांग्रेस और लेफ्ट के बीच गठबंधन का विरोध होगा। केरल में लेफ्ट कांग्रेस के साथ गठबंधन का मुखरता से विरोध करती है।
त्रिपुरा में वोट शेयर की बात करें तो सर्वाधिक वोट भारतीय जनता पार्टी को 39 फीसदी मिला है। वहीं सीपीआईएम को 24.6 फीसदी वोट मिला है। कांग्रेस को 8.6 फीसदी वोट तो अन्य के खाते में 22.1 फीसदी वोट गए हैं। प्रदेश में भाजपा को 31 सीटों पर जीत मिली है,सीपीआईएम को 11, तिपरा मोथा पार्टी को 13, कांग्रेस को 3 और आईपीएफटी को एक सीट पर जीत मिली है।












Click it and Unblock the Notifications