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ट्रेन और मवेशियों की टक्कर यात्री सुरक्षा के लिए कितना बड़ा ख़तरा

Train: वंदे भारत जैसी तेज़ गति से चलने वाली ट्रेनें अब भारतीय रेलवे की प्रमुख यात्री रेलगाड़ियां हैं. इन हाई स्पीड ट्रेनों को देश में रेल यात्रा के 'नए और आधुनिक दौर' के तौर पर पेश किया जाता है.

वंदे भारत
Getty Images
वंदे भारत

वंदे भारत जैसी तेज़ गति से चलने वाली ट्रेनें अब भारतीय रेलवे की प्रमुख यात्री रेलगाड़ियां हैं. इन हाई स्पीड ट्रेनों को देश में रेल यात्रा के 'नए और आधुनिक दौर' के तौर पर पेश किया जाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर ख़ुद इन चमचमाती ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई है.

इन ट्रेनों को लेकर उन्होंने अक्सर कहा है, "ये उस भारत का प्रतीक हैं जो तेज़ बदलाव के रास्ते पर चल पड़ा है."

https://twitter.com/narendramodi/status/1614569587231846401?s=46&t=Diq0HVPaCuOTKbpFNvOMTg

देश में अहमदाबाद मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन शुरू करने का काम भी तेज़ी से चल रहा है.

लेकिन भारत के रेल मार्गों पर दौड़ने वाली वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों का मवेशियों से टकराना कितनी बड़ी समस्या है? क्या इनसे यात्रियों की सुरक्षा ख़तरे में पड़ती है और क्या इसके चलते ट्रैक और ट्रेनों की मरम्मत का ख़र्च काफ़ी बढ़ जाता है?

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की अधिकतम रफ़्तार 160 किलोमीटर प्रतिघंटा है. ये ट्रेन कई बार मवेशियों से टकराई है. इसकी वजह से ट्रेन के तय समय में देरी और नुक़सान दोनों हुए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

वंदे भारत के आगे आईं गाय- भैसें

30 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधीनगर और मुंबई के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी.

छह अक्टूबर को मुंबई से गांधीनगर के रास्ते में वंदे भारत ट्रेन की गुजरात के अहमदाबाद में वटवा और मणिनगर रेलवे स्टेशनों के बीच भैंसों से टक्कर हो गई.

अगले ही दिन सात अक्टूबर को एक बार फ़िर से गुजरात में आणंद के पास फ़िर से एक गाय वंदे भारत ट्रेन से टकरा गई.

इसी वंदे भारत ट्रेन की तीसरी टक्कर 29 अक्टूबर को गुजरात में अतुल स्टेशन के पास हुई. जिससे ट्रेन 15 मिनट के लिए लेट हो गई.

ट्रेन दुर्घटना
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ट्रेन दुर्घटना

बीबीसी को मिली आरटीआई से जानकारी

बीबीसी ने आरटीआई दाख़िल कर रेल मंत्रालय से पूछा कि आख़िर कितनी बार ट्रेन मवेशियों से टकराई है और इसकी मरम्मत में सरकार को कितना खर्च उठाना पड़ा है.

बीबीसी को रेलवे की नाइन डिवीज़न से जानकारी हासिल हुई. उसमें भी कुछ ज़ोन्स का 2019 के पहले का डाटा ना मिल पाने की वजह से बीबीसी ने 2019 और उसके बाद के डाटा का ही विश्लेषण कर इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की.

सरकार से मिले डाटा के मुताबिक़ 2022 में ट्रेन-मवेशियों के टकराने की कुल 13,160 घटनाएं हुईं. ये 2019 के मुक़ाबले 24 प्रतिशत ज़्यादा हैं. 2019 में 10,609 मवेशी ट्रेनों से टकराए थे.

भारतीय रेलवे के नौ ज़ोन में पिछले चार वर्षों में 49,000 से अधिक मवेशी ट्रेन के रास्ते में आए और टकरा गए. उत्तर मध्य रेलवे में ऐसी करीब 4,500 घटनाएं हुईं जो 2022 में सभी ज़ोन में सबसे अधिक संख्या है.

भारतीय रेलवे को कितना नुकसान हुआ?

दिसंबर 2021 में देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में ट्रेन की मवेशियों से टक्कर रोकने के लिए उठाए जा रहे क़दमों की जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि इसमें बाड़ या पटरियों के साथ बाउंड्री बनाना, प्रमुख शहरों के ट्रेन रूटों को सुधारना और मवेशियों को बार-बार चारा और खाना मिलने की संभावना वाले क्षेत्रों से कचरा हटाना और पटरियों के करीब उगी हरी घास, झाड़ियों की छंटाई करने जैसे क़दम शामिल हैं.

अहम बात ये है कि रेल मंत्री ने कहा कि इन घटनाओं में रेलवे को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ.

लेकिन बीबीसी को रेलवे से मिले आरटीआई जवाबों से पता चलता है कि उत्तर रेलवे और दक्षिण-मध्य रेलवे के दोनों ज़ोन ने 2022 में मिल कर पटरियों और ट्रेनों की मरम्मत पर एक करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक खर्च किए. जिसमे उत्तरी रेलवे ने एक करोड़ 28 लाख और दक्षिण-मध्य रेलवे ने दो लाख रुपये से थोड़ा अधिक खर्च किया.

और 2019 में, दक्षिण मध्य रेलवे ने मरम्मत पर 2 लाख 40 हज़ार रुपये ख़र्च किए थे.

ग्राफ़िक्स
BBC
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ऐसी घटनाओं से कितना है ख़तरा?

मवेशियों से रेलवे ट्रैक पर होने वाली टक्करों में ज़्यादा नुकसान वंदे भारत ट्रेन के इंजन के नोज़ कवर का होता है जो मवेशियों के टकराने पर टूट जाते हैं.

फाइबर प्लास्टिक से बने होने के बावजूद, तेज़ गति से होने वाली टक्करों में यह नोज़ कवर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. लेकिन इन्हें आसानी से भी बदला जा सकता है.

29 अक्टूबर 2022 में पश्चिम रेलवे ने ट्वीट कर जानकारी दी, "कैटल-रन-ओवर की घटनाओं ने रेल यातायात पर असर डाला है, जिससे रेल दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है, जिसमें ट्रेन का पटरी से उतरना भी शामिल है. यह यात्रियों की सुरक्षा को भी ख़तरे में डालता है और रेल यातायात को बाधित कर सकता है और रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकता है."

https://twitter.com/westernrly/status/1586407391494406146?s=46&t=EANcy2WpaPj_4decjgMoNQ

लेकिन रेलवे के एक पूर्व सीनियर अधिकारी राकेश चोपड़ा कहते हैं, "पहले ट्रेन इतनी तेज़ गति से नहीं चलती थीं. यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इस तरह की घटनाओं से ट्रेन के पटरी से उतरने की संभावना बढ़ जाती है और यात्रियों की सुरक्षा ख़तरे में पड़ जाती है."

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सज़ा और जुर्माने के प्रावधान?

रेलवे अधिनियम 1989 के तहत, मवेशियों के मालिकों को "जानबूझकर किए गए कार्यों या चूकों के लिए दंडित किया जा सकता है जो रेल यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं."

दोषी पाए जाने पर मवेशी मालिकों को एक साल की सज़ा और जुर्माना भी हो सकता है.

मवेशी मालिकों पर अनाधिकार प्रवेश और अनाधिकार प्रवेश को ना रोकने के लिए मुक़दमा भी किया जा सकता है और दोषी पाए जाने पर छह महीने की सज़ा और 1000 रुपए तक जुर्माना भी हो सकता है.

मसलन, आरटीआई जवाब से मिली जानकारी से पता चलता है कि पश्चिम रेलवे ने 2019-2022 के दौरान जानवरों के मालिकों के ख़िलाफ़ कुल 191 मामले दर्ज़ किए और 9100 रुपये का जुर्माना लगाया.

पश्चिम रेलवे
Western Railway/TWITTER
पश्चिम रेलवे

क्या फेंसिंग है इकलौता समाधान?

23 जनवरी, 2023 को पोस्ट किए गए एक ट्वीट के अनुसार पश्चिम रेलवे मुंबई-अहमदाबाद सेक्शन पर मवेशियों की ट्रेन से टकराने वाली घटनाओं को रोकने और बेहतर यातायात के लिए लगभग 622 किलोमीटर लंबी "मेटल बीम फेंस" का निर्माण कर रही है. ट्वीट के मुताबिक़ सभी टेंडर जारी हो चुके हैं और काम तेज़ी से चल रहा है.

https://twitter.com/westernrly/status/1617535369834303489?s=46&t=EANcy2WpaPj_4decjgMoNQ

ट्रैक को फेंस करने के बारे में रेलवे के पूर्व अधिकारी राकेश चोपड़ा आगे कहते हैं, "रेलवे की पटरियों पर बैरिकेडिंग-बाड़ लगाना समस्या का एक आसान समाधान नहीं है और रेलवे भी यह जानता है. अगर हम ऐसी घटनाओं को रोकना चाहते हैं तो हमें कुछ अलग सोचना होगा."

2022 में वंदे भारत ट्रेनों के साथ हुई टक्करों के बाद महाराष्ट्र में रेलवे सुरक्षा बल ने राज्य में संवेदनशील स्थानों के पास ग्राम प्रधानों को रोकने के मक़सद से नोटिस भी जारी किए हैं.

रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार मानते हैं कि मवेशियों की टक्कर से बचने का एक बेहतर तरीका यह है कि रेलवे पटरियों के पास बसे लोगों के साथ काम करना और ऐसी घटनाओं को रोकने में उनकी भूमिका से अवगत कराना चाहिए.

वो कहते हैं, "मवेशी-ट्रेन टक्करों को रोकने के लिए हम जगह चिन्हित कर गाय-भैंस के लिए कॉरिडोर भी बना सकते हैं. रेलवे लाइन की फेंसिंग की जा सकती है, लेकिन साथ ही यह काफ़ी महंगा भी है."

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