ट्रेड वॉरः सेब, बादाम और अख़रोट सस्ते नहीं खा पाएंगे, जानिए वजह

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते एक जून को सिंगापुर गए थे, जहां उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री ली शियेन लुंग से मुक्त व्यापार और आर्थिक एकीकरण पर बात की थी.

नरेंद्र मोदी ने कहा था, "समस्या का समाधान सीमाओं के भीतर रहकर नहीं मिलते बल्कि गले लगाने से मिलते हैं. हम सभी के लिए समान स्तर चाहते हैं. भारत खुले और स्थिर अतंरराष्ट्रीय व्यापार के पक्ष में खड़ा है."

अमरीका ने स्टील और एल्युमिनियम पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फ़ैसला किया था. ऐसे में भारत ने इसके जवाब में कुछ उत्पादों के आयात शुल्क बढ़ाने का फ़ैसला किया.

भारत सरकार की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन में इस फ़ैसले को "मौजूदा परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई" के तहत ज़रूरी बताया गया है.

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अब आगे क्या?

भारत ने सेब, बादाम, अखरोट, छोले जैसे कृषि उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी 20 से 90 फ़ीसदी तक बढ़ा दी है. पहले बादाम पर प्रति किलो 35 रुपये इंपोर्ट ड्यूटी थी, जो अब बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो कर दी गई है.

छिले हुए बादाम पर इंपोर्ट ड्यूटी 100 से 120 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई है. वहीं सेब पर अब 75 फ़ीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी, जो पहले 50 प्रतिशत थी.

अख़रोट पर लगने वाले ड्यूटी में सबसे ज़्यादा वृद्धि की गई है. इसे 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 120 प्रतिशत कर दिया गया है.

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भारत के बाज़ार पर असर

इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद अब खाने-पीने की ये चीजें भारत में महंगी मिलेंगी. सरकार से इस फ़ैसले से ड्राई फ्रूट्स के व्यापारी चिंतित हैं.

वो मानते हैं कि इस फ़ैसले का सबसे ज़्यादा असर बादाम पर पड़ेगा. भारत बादाम का सबसे बड़ा आयातक देश है. यहां कुल खपत का 80 फ़ीसदी हिस्सा अमरीका से आयात किया जाता है.

कंवरजीत बजाज पिछले 59 सालों से बादाम का व्यापार कर रहे हैं. वो कहते हैं कि पहले इतने बड़े स्तर पर इंपोर्ट ड्यूटी नहीं बढ़ाई गई थी.

वो कहते हैं, "हर साल 90 हज़ार किलो टन बादाम अमरीका से आयात किया जाता है. अगर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जाती है तो वो अपना 50 प्रतिशत बाज़ार खो देगा. इसका असर अमरीका के किसानों और उसकी आमदनी पर पड़ेगा."

"व्यापारी ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और अफ़ग़ानिस्तान से बादाम मंगवाएंगे. भारत के ग्राहकों को यह 100 रुपये अधिक महंगा मिलेगा और खुदरा दुकानों में कीमतें और ज़्यादा हो सकती हैं."

लेकिन इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के फ़ैसले को कई विशेषज्ञ अच्छा मानते हैं. दिल्ली के खाद्य बाज़ार विशेषज्ञ कैथ सुंदरलाल कहते हैं, "अमरीकी सेब देसी सेब से बेहतर होते हैं. अगर बेहतर गुणवत्ता वाले सेब बाज़ार में नहीं रहेंगे तो देसी किसान अच्छे सेब उगाने पर जोर नहीं देंगे. इससे विदेशी सेबों से प्रतियोगिता की भावना कम होगी."

निर्यातकों पर क्या पड़ेगा असर?

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के एल्युमिनियम और स्टील के आयात पर बढ़ाए गए इंपोर्ट ड्यूटी ने भारतीय बाज़ारों पर असर डाला है. एल्युमिनियम पर 25% और स्टील पर 10% टैक्स बढ़ाया गया था.

प्रीत पाल सिंह हरियाणा के पास कोडंली में स्टील के बर्तन का व्यापार करते हैं. यह उनकी तीसरी पीढ़ी है जो यह व्यापार कर रही है.

वो बर्तन बनाते हैं और उसे दुनियाभर में भेजते हैं. वो हर साल करोड़ों रुपये के बर्तन अमरीका भेजते हैं.

70 सालों में पहली बार उनके बर्तनों की मांग अमरीका में घटी है. वो कहते हैं, "हमारी कुल बिक्री का 25 से 30 प्रतिशत अमरीका अकेले ख़रीदता था. यह हमारे लिए बड़ा बाज़ार है. लेकिन अब मांगों में भारी कमी आई है."

उनको लगता है कि अगर अमरीका और भारत के बीच इसी तरह की व्यापार नीति चलती रही तो उन्हें अपनी फैक्ट्री से लोगों को निकालना पड़ेगा.

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अगला कदम क्या होगा

भारत ने विश्व व्यापार संगठन में अमरीका के नीतियों के ख़िलाफ़ अपनी नाराज़गी दर्ज कराई है. लेकिन अभी तक दोनों पक्षों में बातचीत आगे नहीं बढ़ी है. उम्मीद है कि आगे समाधान निकले.

भारत ने अमरीका के लिए बातचीत का दरवाज़ा खुला छोड़ा है. उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक नीतियों के स्तर पर आई इस मुश्किल का समाधान हो.

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