'रूस-यूक्रेन युद्ध से मिली सीख- ताकत होगी तभी आपकी इज्जत होगी'- भारतीय सेना के टॉप जनरल ने बताया
कोलकाता, 24 मई। रूस-यूक्रेन के बीच तीन महीने बीत जाने का बाद भी युद्ध जारी है। यूक्रेन का इतना लंबा प्रतिरोध न सिर्फ रूस के लिए आश्चर्यजनक है बल्कि इसने उन रक्षा विशेषज्ञों की उन संभावनाओं को भी खारिज कर दिया है जो ये कहते रहे हैं कि अब पारंपरिक युद्ध का दौर खत्म हो गया है। इस युद्ध ने एक सबक दिया है कि अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं तो आपको शक्तिशाली होना पड़ेगा और ताकत रखनी पड़ेगी। ये मानना है भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल और पूर्वी कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ राणा प्रताप कालिता का।

जनरल कालिता ने कहा "रूस-यूक्रेन युद्ध से कुछ बातें स्पष्ट रूप से सामने आती हैं। उनमें से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हॉर्ड पॉवर का होना है। आखिरकार एक देश तभी आपका सम्मान करेगा जब आपके पास कठोर शक्ति होगी।"
युद्ध ने खत्म कर दिए कई मिथक
उन्होंने आगे कहा लंबे समय से एक मिथक फैलाया जा रहा था कि अब खुले संघर्ष का समय खत्म हो गया है। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध ने हमें दिखाया है कि खुले संघर्ष के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों को पाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा इसी के साथ छोटी अवधि के युद्धों का मिथक का टूट गया है और इस तथ्य को पुष्ट कर दिया है कि भविष्य की ज्यादातर लड़ाइयां अकेले ही लड़ी जाएंगी। उन्होंने जोर देकर कहा, आत्मनिर्भरता चाहे वह सैन्य हो या कोई और इसकी जरूरत सबसे ज्यादा है।
जनरल कालिता ने कहा "एक मिथक यह भी था कि भविष्य के सभी संघर्ष छोटी अवधि के युद्ध होंगे लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध 3 महीने से अधिक समय से चल रहा है। आखिरकार भविष्य के संघर्ष के किसी भी मामले में एक राष्ट्र को अकेले लड़ना पड़ता है। इसलिए आत्मनिर्भर भारत की ज्यादा जरूरत है जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं।"












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