Tokyo 2020: कभी शिवसैनिकों ने श्रीजेश से पूछा था- क्या तुम पाकिस्तानी हो? आज बना पूरे देश का HERO
नई दिल्ली, 05 अगस्त। आज पूरे भारत का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है, वजह है चार दशकों बाद भारत का सपना पूरा होना। जी हां, यहां बात हो रही है भारतीय हॉकी टीम की, जिसने 41 साल बाद ओलंपिक में मेडल जीता है। मालूम हो कि गुरुवार को टोक्यो ओलिंपिक 2020 में इंडिया की पुरुष हॉकी टीम ने जर्मनी को हराकर कांस्य पदक को अपने नाम किया है। मालूम हो कि हॉकी हमारा नेशनल गेम है, ऐसे में ये जीत दोगुनी है। इस जीत के पीछे पूरी टीम की लगन, मेहनत और समर्पण हैं, जिन्होंने अपने शानदार खेल से आज इतिहास रच दिया।

शिवसैनिकों ने PR से पूछा था- क्या तुम पाकिस्तानी हो?
वैसे तो पूरी टीम इस जीत की हकदार है लेकिन पूरे ओलंपिक के दौरान अगर सबसे ज्यादा चर्चित कोई रहा तो वो हैं गोलकीपर पीआर श्रीजेश, जिन्हें टीम में 'द वॉल' के नाम से संबोधित किया जाता है। इससे पहले क्रिकेट के खेल में ये संज्ञा महान क्रिकेटर राहुल द्रविड़ को दी गई थी लेकिन हॉकी टीम के 'द वॉल' पीआर श्रीजेश ही हैं। जिनके खेल का मुरीद आज केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व हो गया है। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि आज जिस पीआर श्रीजेश की भारतीय तारीफ कर रहे हैं, उन्हीं 'पीआर से कभी पूछा गया था कि क्या तुम पाकिस्तानी हो?'
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‘हॉकी इंडिया लीग' को लेकर मचा था बवाल
और ये सवाल किसी और ने नहीं बल्कि शिवसेना ने किया था, बॉम्बे टाइम्स की खबर के मुताबिक ये बात साल 2013 की है, जब शिवसेना 'हॉकी इंडिया लीग' में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के शामिल किए जाने का विरोध कर रही थी।
शिवसैनिकों का विरोध प्रदर्शन
इसी दौरान महिंद्रा हॉकी स्टेडियम में सभी खिलाड़ियों को प्रैक्टिस से रोका गया था। उस दौरान वहां चार पाकिस्तानी खिलाड़ी भी थे,जिन्हें बवाल मचने के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था लेकिन शिवसेना के कुछ उपद्रवी कार्यकर्ताओं को किसी ने गलत सूचना दे दी कि वहां पाकिस्तानी खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं।

'तुम लोग अपने देश के खिलाड़ियों को नहीं पहचानते'
बस वो शोर मचाते हुए वहां के ड्रेसिंग रूम तक आ पहुंचे , जहां उनकी मुलाकात पीआर श्रीजेश से हुई, जिन्हें देखते ही उन लोगों ने पूछा कि क्या तुम पाकिस्तानी हो?, इस पर पीआर को काफी हैरानी हुई थी लेकिन उन्होंनें हंसते हुए कहा था कि 'जब तुम लोग अपने देश के खिलाड़ियों को नहीं पहचानते तो पाकिस्तान के क्या पहचानोगे? , इसके बाद वो सब लोग वहां से चले गए।
आज पूरा विश्व पीआर राजेश को पहचानता है
फिलहाल आज ये बात काफी पुरानी हो गई है। आज पूरा भारत ही नहीं पूरा विश्व पीआर को पहचानता है। आपको बता दें कि किसान पुत्र पीआर श्रीजेश ने 12 साल की उम्र में घर छोड़ा था।दरअसल शुरू में हॉकी से ज्यादा वॉलीबॉल में रूचि रखने वाले पीआर को वॉलीबॉल खेलने के आधार पर ही तिरुवनंतपुरम के स्पोर्ट्स स्कूल में पढ़ने का अवसर मिला था लेकिन ये स्कूल उनके गांव से दूर था इसलिए 12 साल के पीआर श्रीजेश को घर छोड़ना पड़ा और यहीं से उनकी जिंदगी बदल गई क्योंकि स्कूल में उनकी दिलचस्पी हॉकी में बढ़ी और उन्होंने गोलकीपिंग शुरू कर दी और बहुत जल्द ही वो काफी चर्चित हो गए और साल 2013 में उन्हें दिल्ली के जूनियर कैंप के लिए चुन लिया गया।

श्रीजेश आज बने पूरे भारत के Hero
जहां उन्हें हिंदी ना आने के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ी। उनके पास महंगी किट भी नहीं थी लेकिन अपने खेल के दम पर पीआर ने वो कर दिखाया, जिसे कर पाना आसान काम नहीं था। उन्होंने 2014 का एशियन गेम्स में टीम को गोल्ड दिलाने में अहम रोल निभाया था तो वहीं साल 2014 के कॉमनवेल्थ की सिल्वर मेडलिस्ट टीम में भी वो शामिल थे। वो टीम के कैप्टन की भी सीट संभाल चुके हैं।












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