'वो मेरे बेटे जैसा, पिता का काम हैं माफ कर देना', अचानक क्यों बदले कल्याण बनर्जी के सुर?
Kalyan Banerjee and Abhishek Banerjee: तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रहे विद्रोह और बगावत के बीच टीएमसी सांसद और जाने-माने वकील कल्याण बनर्जी ने अचानक पलटी मार कर सबको हैरान कर दिया है। टीएमसी आलाकमान ममता बनर्जी पर दो दिन पहले तीखा हमला बोलते हुए अल्टीमेटम देने वाले इस कद्दावर नेता के तेवर अब अचानक नरम पड़ गए हैं।
अभिषेक बनर्जी से नाराज होकर पार्टी छोड़ने की धमकी देने के बाद कल्याण बनर्जी ने अपने तीखे बयानों से पूरी तरह यू-टर्न ले लिया। शनिवार को समाचार एजेंसी एएनआई से खास बातचीत में कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के रिश्तों पर बेहद ड्रामेटिक अंदाज में खुलकर बातचीत की। उन्होंने खुद को एक बड़ा अभिभावक साबित करते हुए कहा, "अभिषेक बनर्जी हमारे राष्ट्रीय महासचिव हैं, 'वह मेरे बेटे जैसा है, बेटे की सभी गलतियों को माफ करना पिता का काम है, मैं कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं रखता।"

Kalyan Banerjee और Abhishek Banerjee क्यों हुई थी तनातनी
याद रहे 11 जून को कल्याण बनर्जी ही बताया था कि अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े केस से उन्हें हटाकर किसी और एडवोकेट को सौंप दिया है। तब उन्होंने अभिषेक बनर्जी को अहंकारी कहा था और उन्हें टीएसी पर आई मुश्किलों के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि "वह बहुत अहंकारी व्यक्ति हैं। यह समझना होगा कि अभिषेक बनर्जी की वजह से आज पार्टी बर्बाद हो गई है। हमने इसे खो दिया है। हर कोई यही कह रहा है।"
ममता दीदी को दिया था अल्टीमेटम
इसके अलावा कल्याण बनर्जी ने अपने सख्त तेवर दिखाते हुए ममता बनर्जी को सीधे तौर पर अल्टीमेटम देते हुए कहा था, 'मुझे या अभिषेक बनर्जी में आप किसी एक को चुनें। उन्होंने यह चेतावनी भी दी थी कि यदि तृणमूल प्रमुख ने अपने भतीजे अभिषेक का समर्थन करना जारी रखा, तो वे भविष्य में कोई दूसरा गंभीर निर्णय लेने के लिए वो मजबूर हो जाएंगे। हालांकि शनिवार को उनके नए बयानों से साफ हो गया है कि वे फिर से ममता दीदी वाले खेमे में शामिल हो गए हैं।
ममता बनर्जी और टीएमसी में टूट पर क्या बोले कल्याण बनर्जी?
कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट वफादारी जताते हुए साफ कहा, "ममता बनर्जी मेरी नेता हैं। वे मेरी एकमात्र नेता हैं। उनके प्रति मेरी पूरी वफादारी है। वे जो कुछ भी कहेंगी, मैं वही करूंगा।" उनके इस नए रुख से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी एक नया संदेश गया है।
लोकतंत्र आज खतरे में आ गया
उन्होंने आरोप लगाया कि समूचे राज्य में लोकतंत्र आज खतरे में आ गया है। कल्याण बनर्जी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में पहले कभी भी ऐसे विपरीत हालात नहीं रहे, जहां विपक्ष को पूरी तरह कमजोर या समाप्त कर दिया गया हो। उन्होंने मुख्यमंत्री के रवैये को बदले की भावना से प्रेरित बताया।
बागी तृणमूल सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की योजना बनाने का दावा किया जा रहा था। इस पर कल्याण बनर्जी ने ऐसे कयासों को बेबुनियाद और केवल ध्यान भटकाने वाली एक सुनियोजित राजनीतिक चाल करार दिया।
ममता बनर्जी की TMC में क्यों हुई बगावत?
दरअसल, विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार का सामना करने के बाद टीएमसी में ओल्ड बनाम न्यू की एक बड़ी जंग चल रही है। जहां एक तरफ ममता बनर्जी के सबसे वफादार और पुराने वरिष्ठ नेता अपनी सुप्रीमेसी को सुरक्षित करने में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ अभिषेक बनर्जी के खिलाफ टीएसी की यूथ ब्रिगेड ने मोर्चा खोल दिया है। इस अंदरूनी लड़ाई टीएमसी की नींव तक हिल गई है।
Mamata Banerjee की लीडरशिप और नया अल्टीमेटम
राजनीतिक गलियारों में इस बात की तेज चर्चा है कि अभिषेक बनर्जी ने हाल ही में सांगठनिक सुधारों को लागू करने के लिए पार्टी लीडरशिप को एक कड़ा अल्टीमेटम दिया था। इस हाई-वोल्टेज प्रेशर सिचुएशन के बाद ही वरिष्ठ नेताओं और खासकर कल्याण बनर्जी के तेवरों में यह नरमी देखने को मिली है।
अपने बयान में कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी की प्रशंसा करते हुए कहा, "वह एक अच्छे लड़के हैं। वह काफी मेहनत कर रहे हैं। मैं बहुत खुश हूं।" उन्होंने इसके साथ ही यह भी साफ किया कि वे एक मैच्योर अभिभावक के तौर पर उनकी किसी भी कड़वी बात को कभी दिल पर नहीं लेते।
कल्याण बनर्जी के अचानक क्यों बदले तेवर?
हालांकि बंगाल की राजनीति के एक्सपर्ट्स इस पूरे नए घटनाक्रम को एक बहुत ही सोची-समझी डिप्लोमेसी का हिस्सा बता रहे हैं। कल्याण बनर्जी इस बयान के जरिए खुद को पार्टी के भीतर एक बड़े और समझदार अभिभावक के रूप में पेश कर रहे हैं, जिससे अभिषेक ब्रिगेड के पास उन पर वार का मौका न रहे। वहीं ये भी संभावना है कि टीएमसी के बागी दल के खेमे में ये शामिल होना चाहते थे लेकिन इन्हें स्वीकारा ना गया हो।













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