Bangladesh: अल्पसंख्यकों पर हमलों पर बोले TMC नेता सुदीप बंद्योपाध्याय, कहा-'संयुक्त राष्ट्र से मदद ले भारत'

Bangladesh: बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं, पर बढ़ते हमलों के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय केंद्र सरकार से संयुक्त राष्ट्र से संपर्क कर पड़ोसी देश में शांति सेना तैनात करने का आग्रह किया है।

लोकसभा में शून्यकाल के दौरान TMC के वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को गंभीर अत्याचारों और हत्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने भारत सरकार की चुप्पी की आलोचना की और विदेश मंत्री एस जयशंकर से इस मामले पर सदन को जानकारी देने का आग्रह किया।

Sudip Bandyopadhyay

हमलों की बढ़ती घटनाएं

रिपोर्टों के मुताबिक 5 अगस्त को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद से 50 जिलों में हिंदुओं पर 200 से अधिक हमले दर्ज किए गए हैं। बांग्लादेश की कुल जनसंख्या का 8 प्रतिशत हिस्सा हिंदू समुदाय से है। जो इन घटनाओं से सीधे प्रभावित हो रहे है।

TMC का दावा है कि पश्चिम बंगाल जो बांग्लादेश का तत्काल पड़ोसी है। इन घटनाओं से गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। इतिहास गवाह है कि ऐसे संकट के समय पश्चिम बंगाल को शरणार्थियों की बड़ी संख्या में आमद का सामना करना पड़ा है।

ममता बनर्जी ने केंद्र से की अपील

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश में शांति स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र से संपर्क करे। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि यह मुद्दा उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। लेकिन उन्होंने विदेश मंत्रालय से बांग्लादेशी अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र के साथ चर्चा करने का अनुरोध किया।

बनर्जी ने सुझाव दिया कि बांग्लादेश सरकार के साथ विचार-विमर्श के बाद एक अंतर्राष्ट्रीय शांति सेना भेजी जा सकती है। ताकि सामान्य स्थिति बहाल हो सके।

TMC की आलोचना और कार्रवाई का आह्वान

TMC ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए भारत की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। पार्टी का मानना है कि बांग्लादेश के साथ भारत के ऐतिहासिक और भौगोलिक संबंधों को देखते हुए इस संकट में हस्तक्षेप आवश्यक है।

संयुक्त राष्ट्र से शांति सेना तैनात करने की अपील TMC के अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राजनयिक प्रयासों पर जोर को दर्शाती है। उनका उद्देश्य न केवल मौजूदा संकट का समाधान करना है। बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए स्थायी समाधान की दिशा में काम करना भी है।

आगे की चुनौतियां और कूटनीतिक प्रयास

भारत और बांग्लादेश के अधिकारियों से इस मुद्दे पर अगले कदमों की प्रतीक्षा की जा रही है। बांग्लादेश में जारी धार्मिक हिंसा और उसके प्रभाव ने क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र के साथ संभावित वार्ता पर सबकी नजरें होंगी। यह संकट भारत-बांग्लादेश के ऐतिहासिक संबंधों और क्षेत्रीय शांति के लिए एक चुनौती बना हुआ है।

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