इस तरह होता है दलाई लामा का सेलेक्शन, तिब्बती धर्मगुरु को चुनने के पीछे 'पुनर्जन्म' का क्या है रहस्य?
How Dalai Lama is chosen: तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को चुनने की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं होती, जितनी कि लगती है। बौद्ध धर्म के लोग पुनर्जन्म में भरोसा करते हैं। ऐसे में ये प्रक्रिया भी इसी आधार पर होती है।

Dalai Lama selection: दलाई लामा इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं। विवादों में घिरे दलाई लामा की उम्र सिर्फ दो साल की थी, जब उन्हें 14वां दलाई लामा घोषित किया गया।
कैसे बनते हैं दलाई लामा?
दलाई लामा कैसे बनते हैं? क्या प्रक्रिया होती है? किसे दलाई लामा बनाया जाता है? ऐसे तमाम तरह के सवाल लोगों के जहन में हमेशा ही घूमते हैं। चलिये इन सवालों के जवाब जानते हैं।
ये हैं 14वें दलाई लामा
दलाई लामा कोई और नहीं बल्कि सन्यासी होते हैं। वर्तमान में दलाई लामा 14वें लामा हैं, जिन्हें तिब्बतियों का धर्मगुरु माना जाता है। दलाई लामा को बोधिसत्व और तिब्बत का संरक्षक माना जाता है। दरअसल, दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन साल 1644 से 1911 तक किंग राजशाही की ओर से होता आया है। लेकिन ये प्रक्रिया सिर्फ इतनी ही नहीं होती। दलाई लामा के चयन के बाद इन्हें केंद्र सरकार की ओर से मान्यता मिलना भी बेहद जरूरी होता है।
क्या है मौत के संकेत का रहस्य?
बौद्ध धर्म के अनुयायी पुनर्जन्म में भरोसा करते हैं। ऐसे में माना जाता है कि दलाई लामा अपनी मौत के संकेत पहले ही देना शुरु कर देते हैं और दलाई लामा की मौत के बाद ही अगले यानी नए दलाई लामा की खोज शुरु हो जाती है। ये खोज दलाई लामा की संकेतों के आधार पर होती है। इसके लिए नवजात बच्चों को खोजा जाता है, जो दलाई लामा की मौत के 9 महीने बाद पैदा हुए हों।
मौत होते ही शुरु होती है खोज
अगला धर्मगुरु बनाने के लिए नवजात बच्चों की खोज शुरु हो जाती है। वर्तमान लामा के निधन होते ही तुरंत बाद अगले दलाई लामा को ढूंढने लगते हैं। ऐसे में नवजात बच्चों की खोज शुरु हो जाती है। कई बार ये खोज काफी दिनों तक चलती है। कई बार ऐसा भी होता है कि दलाई लामा के बताए गए संकेत एक से ज्यादा बच्चों में नजर आते हैं। ऐसे में इन बच्चों को कई शारीरिक और मानसिक परीक्षाओं से होकर गुजरना पड़ता है।












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