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Three New Criminal Laws 2024: 'अब दंड की जगह त्वरित न्याय', विपक्ष की चिंताओं के बीच शाह का जवाब

Three New Criminal Laws 2024: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनता को भरोसा दिलाया कि सोमवार को लागू हुए तीन नए आपराधिक कानून सजा के बजाय न्याय प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। नए कानूनों पर विपक्ष द्वारा उठाई गई चिंताओं का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली पूरी तरह से 'स्वदेशी' बन रही है।

1 जुलाई से नए कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) ने ब्रिटिश काल के आईपीसी, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ले ली है। संसद पुस्तकालय में मीडिया को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि सुधार न्यायिक प्रक्रिया की गति को बढ़ाने में मदद करेगा।

Amit Shah

औपनिवेशिक कानून खत्म
शाह ने आगे यह भी कहा क‍ि मैं देश के लोगों को बधाई देना चाहता हूं कि आजादी के करीब 77 साल बाद हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी बन रही है। यह भारतीय मूल्यों पर काम करेगी। 75 साल बाद इन कानूनों पर विचार किया गया और आज जब ये कानून लागू हुए हैं, तो औपनिवेशिक कानूनों को खत्म कर दिया गया है और भारतीय संसद में बने कानूनों को अमल में लाया जा रहा है।

अब 'दंड' की जगह त्वरित 'न्याय'
शाह ने कहा क‍ि दंड की जगह अब न्याय होगा। देरी की जगह त्वरित सुनवाई और त्वरित न्याय होगा। पहले केवल पुलिस के अधिकारों की रक्षा की जाती थी, लेकिन अब पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं के अधिकारों की भी रक्षा की जाएगी।" प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शाह ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में धाराओं और अध्यायों की प्राथमिकता भारतीय संविधान की भावना के अनुरूप तय की गई है।

उन्होंने कहा क‍ि पहली प्राथमिकता महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों (अध्यायों) को दी गई है। मेरा मानना है कि यह बहुत पहले किया जाना चाहिए था। 35 धाराओं और 13 प्रावधानों वाला एक पूरा अध्याय जोड़ा गया है। अब, सामूहिक बलात्कार के लिए 20 साल की कैद या आजीवन कारावास की सजा होगी, नाबालिग से बलात्कार के लिए मौत की सजा होगी, पहचान छिपाकर या झूठे वादे करके यौन शोषण के लिए एक अलग अपराध परिभाषित किया गया है।

'अब पीड़िता का बयान उसके घर में दर्ज होगा'
शाह कहा क‍ि पीड़िता का बयान उसके घर पर ही महिला अधिकारियों और उसके अपने परिवार की मौजूदगी में दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, ऑनलाइन एफआईआर की सुविधा भी दी गई है। हमारा मानना है कि इस तरह से बहुत सी महिलाओं को शर्मिंदगी से बचाया जा सकता है।" भाजपा ने आज कहा कि नए आपराधिक कानून भारत की प्रगति और लचीलेपन का प्रतीक हैं, जो देश को अधिक न्यायपूर्ण और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाएंगे।

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