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जानिए इस रेलवे स्टेशन के बारे में जहां यात्री है मुर्गी तो स्टेशन मास्टर है चोर

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railway station got robbed

तो कंफ्यूज मत होइए हम आपको बता देते हैं। झरिया रेलवे स्टेशन अपने समय में काफी महत्वपूर्ण स्टेशन माना जाता था। लेकिन कुछ कारण बस अब इस रेलवे स्टेशन में मुर्गीपालन तथा चोरों का अड्डा हो गया है। धीरे-धीरे चोर अपना अड्डा जमाने के साथ साथ पूरे रेलवे स्टेशन को ही चुरा ले गए हैं।

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रेलवे विभाग द्वारा यह घोषणा किया जाना कि "रेल की संपत्ति अपनी संपत्ति है" को चोरों ने सीरियसली ले लिया और अपनी संपत्ति समझ रेलवे ट्रैक, प्लेटफार्म पर लगे काउंटर, ट्रैक के किनारे लगे खंभे, फाटक, सिग्नल लाइट, समेत कई महंगे उपकरण और कीमती पार्ट्स चुराकर ले गए। इतना ही नहीं रेलवे को अपनी संपत्ति समझते हुए स्टेशन के कमरे में मुर्गीपालन का धंधा शुरू कर दिया।

अपने जमाने में सबसे खास थी ये रेलवे स्टेशन

उल्लेखनीय है कि धनबाद-झरिय रेल मार्ग अपने जमाने में सबसे व्यस्ततम रेलमार्ग मानी जाती थी। इस रेल मार्ग के रास्ते में करीब छोटे-बड़े दर्जनों स्टेशन पड़ते थे। आज इनमें से अधिकतर रेलवे स्टेशन या तो गायब हो चूके हैं या चोरों का अड्डा बन चुके हैं। आपको बताते चलें की इस क्षेत्र को अग्नि प्रभावित क्षेत्र घोषित होने के वजह से रेल विभाग ने वर्ष 2004-05 से इस मार्ग से रेल का परिचालन बंद कर दिया। जिसके बाद से यह सभी रेलवे स्टेशन चोरों के अड्डे बन गए।

 railway office turned into poultry farm

चोरों ने गायब कर दी करोड़ों की संपत्ति

वर्ष 2005 में रेलवे का परिचालन इस मार्ग से बंद होने के बाद देखते देखते चोरों ने धनसार, झरिया सहित इस मार्ग में पड़ने वाले दर्जनों रेलवे स्टेशन पर अपना कब्जा जमा लिया और इसका निशान खत्म कर दिया। वहीं आज की स्थिति अगर देखें तो धनबाद से झरिया स्टेशन जानेवाले रूट पर खेती की जाती है।

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तो रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म के कमरे में मुर्गी पालन तथा दुकान खोल दी गई है। आपको बताते चलें की यू तो जब रेलवे द्वारा इस रूट से रेल परिचालन को बंद कर दिया था तभी से ही यह सभी रेलवे स्टेशन उजड़ गया था। पर स्टेशन पर लगे फुटवेअर ब्रिज, यात्री शेड, रेलव ट्रैक जैसे कई चीज रह गई थीं जिसे रेलवे नहीं ले जा सकी। वहीं स्टेशन के खत्म होते सुरक्षा व्यवस्था की कमी को देखते हुए चोरों ने वहां मौजूद रेलवे का सारा सामान गायब कर दिया।

This railway station got robbed, railway office turned into poultry farm

अंग्रेजों ने बनाया था इस रेल मार्ग को

देश की कोयला के नाम से अघोषित राजधानी धनबाद का वर्षों पुराना शहर झरिया जो कभी राजा महाराजा की वजह से देश की शान हुआ करती थी, आज अपनी बदहाली पर खुद शर्मिंदा है। उल्लेखनीय है कि अंग्रेजों के द्वारा वर्ष 1905 में यहां रेल लाइन का निर्माण कराया गया था।

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अंग्रेजों के जाने के बाद भारत सरकार ने इस रेलवे लाइन को और डवलप करते हुए धनबाद झरिया सिंधरी रेल लाइन कर दिया। जोकि देश की सबसे व्यस्तम रेल लाइन हुआ करती थी। कोयले की ढुलाई की वजह से यह रेल मार्ग पूरे देश में प्रचलित था।

लेकिन वर्ष 2005 में कोयला उत्खनन में काम करने वाली कंपनी ने सरकार को एक लिखित आवेदन देते हुए इस रेल लाइन को बंद करने की सिफारिश करते हुए कहा कि यहाँ कोयले की वजह से जमिनी आग फैल रही है। जिसे देखते हुए रेलवे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इस रेलवे लाइन को बंद कर दिया।

नोट: सभी फोटो सोशल मीडिया से लिए गए हैं।

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English summary
The railway station that falls on the Dhanbad-Jhariya-Sindri route (Jharkhand State) was entirely robbed and became invisible in no time.
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