'...ये झूठ है, हमने नहीं छोड़े मुगलों के विषय', 12वीं के Syllabus में बदलाव पर बोले NCERT के निदेशक
एनसीआरटी के 12वीं क्लास के इतिहास विषय के बदलाव को लेकर किए जा रहे दावों को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के निदेशक ने गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि सब कुछ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हो रहा है।

NCERT Syllabus: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने इतिहास की किताबों से मुगल साम्राज्य का चैप्टर हटाए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। एनसीआरटी की ओर से कहा गया है कि सेलेबस से हटाए गए वो चैप्टर्स हैं, जिनके हटाए जाने से छात्रों के ज्ञान पर कोई असर नहीं होगा। मंगलवार को एक बयान में एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि मुगलों के विषय के चैप्टर हटाए जाने को लेकर कही जा रही बातें झूठ हैं।
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 12वीं क्लास के विषय का पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। कुछ चैप्टर्स को सिलेबस से हटा दिया गया है। इनमें मुख्य तौर पर मुगल इम्परर चैप्टर को हटाया गया है यानी अब छात्र मुगल साम्राज्य का इतिहास नहीं पढ़ेंगे। इस बदलाव के बाद वे सभी बोर्ड नए नियम का पालन करेंगे जहां एनसीईआरटी की किताबें लूागू की गई हैं। सीबीएसई बोर्ड के इंटरमीडिएट के पाठ्यक्रम में बदलाव होगा। इसके अलावा यूपी बोर्ड के किताबों में भी बदलाव होंगे।
मुगलों से जुड़े चैप्टर हटाए को लेकर मंगलवार को एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी (Dinesh Prasad Saklani) ने कहा, "यह झूठ है। मुगलों के विषय को नहीं छोड़ा गया है। पिछले साल कोविड के कारण छात्रों पर दबाव अधिक था। विशेषज्ञ समितियों ने 6 से 12 तक के किताबों के सिलेबस की जांच की। उन्होंने सिफारिश की कि अगर कुछ अध्याय हटा दिए जाते हैं तो इससे बच्चों के ज्ञान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एनसीआरटी ने ऐसे में निर्णय लिया की छात्रों पर पड़ने वाले एक अनावश्यक बोझ हटाया जा सकता है। इस पर बहस अनावश्यक है। जो नहीं जानते हैं, वे पाठ्यपुस्तकों की जांच कर सकते हैं।"
एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने आगे कहा, "हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुसार काम कर रहे हैं। एनईपी 2020 कंटेंट लोड को कम करने की बात करता है। हम इसे लागू कर रहे हैं। स्कूली शिक्षा के लिए एनसीएफ (नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क) बन रहा है। जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। NEP के अनुसार 2024 में पाठ्यपुस्तकें छपेंगी। हमने अभी कुछ भी नहीं छोड़ा है।"












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