राजनीति सदा चलि आई, पद जाय पर 'बंगला' न जाई

इसी तरह करप्शन केस में सजा की वजह से संसद की सदस्यता खो चुके लालू यादव भी हैं और 2जी के खलनायक माने जाने वाले ए. राजा भी शामिल हैं। अलबत्ता लालू यादव के अनुरोध पर सरकार ने मेहरबानी दिखाते हुए एक साल तक उन्हें मंत्री वाले बंगले में रहने की इजाजत दे दी है।
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महत्वपूर्ण यह है कि पद छोड़ने के बावजूद बंगले पर कब्जा जमाने वालों में ममता बनर्जी की टीएमसी के नेता भी शामिल हैं। ये वे मंत्री हैं, जिन्होंने मल्टीब्रैंड रिटेल में एफडीआई की इजाजत देने पर सरकार से समर्थन वापस लेते हुए फौरन ही मंत्री पद छोड़ दिए थे, लेकिन बंगलों पर उनका कब्जा बरकरार है।
इनमें से ज्यादातर तो ऐसे हैं, जिन्होंने लगभग डेढ़ साल पहले ही मंत्री पद छोड़ दिया था, लेकिन बंगले पर अभी भी उनका कब्जा है। ये तथ्य शहरी विकास मंत्रालय के संपदा निदेशालय ने राइट टु इन्फर्मेशन (आरटीआई) के तहत दिए गए हैं।
आरटीआई के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में बताया गया है कि 22 ऐसे पूर्व मंत्री हैं, जिनका अभी भी अपने बंगले पर कब्जा है। इनमें से पांच मंत्री ऐसे हैं, जिन्होंने 22 सितंबर 2012 को ही मंत्री पद छोड़ दिया था। इनके नाम हैं- पूर्व रेल मंत्री मुकुल राय और दिनेश त्रिवेदी, सुदीप बंद्योपाध्याय, सुल्तान अहमद, सौगत राय।
इनके अलावा अन्य पूर्व मंत्रियों के नाम हैं : शिशिर अधिकारी, सी. एम. जतुआ, पूर्व विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा, मुकुल वासनिक, अगाथा संगमा, सुबोधकांत सहाय, महादेव सिंह, ए. राजा, दयानिधि मारन, वी. एव. पाला, पवन कुमार बंसल, एस. एस. पल्लमानिकरम, डॉ. एस. जगतरक्षकन, एस. गांधीसेल्वन, सी. पी. जोशी और हरीश रावत। इनमें से हरीश रावत ने इसी साल 1 फरवरी को मंत्री पद छोड़ दिया था और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कमान संभाल ली थी।
इसके अलावा संपदा निदेशालय ने आरटीआई के तहत सवाल पूछने वाले सुभाष अग्रवाल को भेजे जवाब में यह भी बताया है कि करप्शन के मामले की वजह से अपनी सदस्यता गंवाने वाले लालू यादव ने एम्स में अपने और अपनी बेटी के इलाज का और एक बेटी के संस्कृति स्कूल में पढ़ने का हवाला देकर मंत्रालय से इस साल जनवरी में अनुरोध किया था कि 25, तुगलक रोड के बंगले में उन्हें एक साल और रहने की इजाजत दी जाए। सरकार ने इसे मंजूर कर लिया।
इसी तरह से पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह ने भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए किराए में संशोधन का अनुरोध किया था, जिसे बाद में सरकार ने मान लिया।
दरअसल , बूटा सिंह का कहना था कि उन्हें जेड कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई है और इसी नाते उन्हें तीनमूर्ति मार्ग का बंगला दिया गया था। इस बंगले का पहले किराया 58 हजार 500 रुपये था , जिसे जनवरी 2013 में बढ़ाकर एक लाख छह हजार रुपये से भी ज्यादा कर दिया गया।
उनका कहना था कि उन्हें पूर्व सांसद के नाते महज 60 हजार रुपये महीने ही पेंशन मिलती है , इसलिए उनके लिए बढ़ा हुआ किराया चुकाना संभव नहीं है। इसी आधार पर उनके किराए में संशोधन किया गया। कुछ इसी रंग में रंगी देश की राजनीति, जिसमें जनता त्रस्त है और नेता मस्त हैं।
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