क्या बजट से जुड़ी इन बातों को जानते हैं आप
नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली एक बार फिर से देश का बजट पेश करने हो तैयार हैं। 29 फरवरी को आप सभी लोगों को पता लगेगा कि इस बार बजट में जेटली ने क्या सस्ता किया है और क्या-क्या महंगा हुआ है।
बतौर वित्त मंत्री जेटली के लिए यह तीसरा मौका है जब वह आम बजट पेश करेंगे।
वित्त मंत्री के पिटारे से इस बार आम जनता के लिए क्या निकलेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन बजट को लेकर हमेशा से जो बेचैनी लोगों में नजर आती थी, वही बेचैनी एक बार फिर से नजर आ रही है।
हर बार की तरह इस बार भी आप सभी लोग सोच रहें होंगे कि टैक्स सिस्टम अगले एक वर्ष तक कैसा रहेगा, आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा वगैरह-वगैरह।
इन सब बातों से अलग आपको कुछ उन बातों को भी जानना चाहिए जो बजट से जुड़ी हैं। आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करिए और कुछ ऐसी ही बातों के बारे में जानिए।

देश का पहला बजट
सात अप्रैल 1860 में देश का पहला बजट आया था। उस दौरान ब्रिटिश शासन था और बजट ईस्ट इंडिया कंपनी के जेम्स विल्सन ने पेश किया था।

स्वतंत्र भारत का पहला बजट
स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को शाम पांच बजे देश के पहले वित्त मंत्री आरके शानमुखम चेट्टी ने पेश किया था। यह बजट सिर्फ 7.5 माह तक ही चल सका।

पहली बार हिंदी में प्रिंट हुए डॉक्यूमेंट्स
वर्ष 1955-1966 के आम बजट के दौरान बजट से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स को हिंदी में प्रिंट किया गया। यह देश के इतिहास में पहला मौका था जब बजट हिंदी में प्रिंट हुआ।

बजट और हलवा
बजट पेश करने से पहले नॉर्थ ब्लॉक में एक हलवा सेरेमनी होती है। इस हलवे को वित्त मंत्री की ओर से तैयार किया जाता और फिर वहीं अधिकारियों में इसे बांटते हैं।

कमरे में बंद अधिकारी
बजट की तैयारियों के समय वित्त मंत्रालय के सभी अधिकारी एक अनजान जगह पर रहते हैं। इन्हें मोबाइल और इंटरनेट के प्रयोग की भी मंजूरी नहीं होती है। ये सभी अधिकारी सिर्फ उस समय बाहर आते हैं जब वित्त मंत्री बजट पेश करने के लिए तैयार होते हैं।

राष्ट्रपति तय करते हैं दिन
बजट किस दिन प्रस्तुत किया जाएगा इसका फैसला राष्ट्रपति ही लेते हैं। बजट भाषण दो हिस्सों में बंटा होता है। पहला हिस्सा इकोनॉमिक सर्वे कहलाता है तो दूसरा हिस्सा टैक्स से जुड़े मुद्दों पर आधारित होता है।

यशवंत सिन्हा ने बदली एक प्रथा
वर्ष 2000 तक आम बजट अक्सर फरवरी के आखिरी वर्किंग डे पर शाम पांच बजे पेश होता था लेकिन जब यशवंत सिन्हा को वित्त मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया तो उन्होंने वर्ष 2001 में दिन में 11 बजे बजट पेश किया। इसके साथ ही बजट को दिल में पेश करने की परंपरा शुरू हुई।

मोरारजी देसाई के नाम एक रिकॉर्ड
मोरारजी देसाई के नाम पर सबसे ज्यादा बार देश का बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। उन्होंने 10 बार देश का बजट पेश किया था। इसके अलावा वह देश के अकेले वित्त मंत्री थे जिन्होंने अपने जन्मदिन के मौके पर भी बजट पेश किया। उन्होंने 29 फरवरी 1964 और फिर 29 फरवरी 1968 को जन्मदिन पर बजट पेश किया।

इन प्रधानमंत्रियों ने भी पेश किया बजट
जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने बजट को पेश किया था।

जब एक बजट ने बदली देश की दिशा
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 1991-1993 में बजट पेश किया और आयात शुल्क को 300 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत पर कर दिया था। इसकी वजह से देश में उदारीकरण का दौर शुरू हुआ था।












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