Good News:देश में खाद्य तेल का पर्याप्त स्टॉक, इंडोनेशिया का बैन बेअसर, दाम पर लगाम लगाने की ये है तैयारी
नई दिल्ली,1 मई: इंडोनेशिया ने घरेलू किल्लत की वजह से पाम ऑयल के निर्यात पर पाबंदी लगा दी है, जिसका भारत बहुत बड़ा आयातक है। लेकिन, अच्छी खबर ये है कि देश में फिर भी खाद्य तेल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और इस महीने काफी बड़ी मात्रा में स्टॉक और जमा होने वाला है। सरकार के इतने भरोसे की वजह ये भी है कि सोयाबीन का भी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा हुआ है और सरसों का भी उत्पादन पिछले साल की तुलना में एक-तिहाई से ज्यादा होने के आसार हैं। इस बीच खाद्य तेल की जमाखोरी और मुनाफाखोरी रोकने के लिए भी सख्त तैयारी कर ली गई है।

21 लाख मीट्रिक टन स्टॉक मौजूद,12 लाख मीट्रिक टन इस महीने
भारत में सभी तरह के खाद्य तेलों का स्टॉक जरूरत के अनुकूल है। औद्योगिक सूत्रों के मुताबिक इस समय देश में सभी तरह के खाद्य तेलों का लगभग 21 लाख मीट्रिक टन स्टॉक मौजूद है। मई महीने में करीब 12 लाख मीट्रिक टन और उपलब्ध हो जाएगा। इसलिए इंडोनेशिया के निर्यात पर बैन लगाने के बावजूद देश में इसकी पर्याप्त उपलब्धता रहेगी। उपभोक्ता मामले, खाद्य और जनवितरण मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि खाद्य और जन वितरण विभाग कीमतों और उपलब्धता पर लगातार निगरानी रख रहा है और साथ ही प्रमुख खाद्य तेल निर्माता संगठनों के साथ भी लगातार बैठकें की जा रही हैं, ताकि तेल की घरेलू कीमतों में कमी लाई जा सके और उपभोक्ताओं को राहत मिले।

तिलहन के भी ज्यादा उत्पादन होने का अनुमान
कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग ने फरवरी में तिलहन के उत्पादन को लेकर जो दूसरा एडवांस अनुमान जारी किया था, उससे भारत में सोयाबीन के उत्पादन को लेकर बहुत ही बेहतर तस्वीर देखने को मिली है। साल 2021-22 में इसका उत्पादन 126.10 लाख मीट्रिक टन होने की बात कही गई है, जो कि पिछले साल के 112 लाख मीट्रिक टन से काफी ज्यादा है। सिर्फ सोयाबीन ही नहीं, राजस्थान समेत बाकी सरसों उत्पादक राज्यों में भी इसका बीजारोपण पिछले साल से 37% ज्यादा हुआ है। इसके चलते अनुमान है कि 2021-22 के सीजन में इसका उत्पादन बढ़कर 114 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच जाएगा।
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देश में कहां से कितना खाद्य तेल आयात होता है ?
देश में कुल जितना खाद्य तेल आयात होता है, उसमें मोटे तौर पर पाम ऑयल (क्रूड+रिफाइंड) का हिस्सा 62% के करीब है। भारत का इसका सबसे बड़ा निर्यातक इंडोनेशिया और मलेशिया है। जबकि, बाहर से आने वाले खाद्य तेल में सोयाबीन का हिस्सा 22% है, जो कि अर्जेंटीना और ब्राजील से मंगवाया जाता है। वहीं सनफ्लावर ऑयल की हिस्सेदारी 15% है और इसका आयात यूक्रेन और रूस से होने की वजह से इस बार इसपर संकट मंडरा रहा है।

9 तरह के तिलहन का 3.714 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान
लेकिन, इस बार तिलहन का उत्पादन वैश्विक स्तर पर घटने और निर्यातक देशों की ओर से इसपर टैक्स और लेवी बढ़ाए जाने की वजह से इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमतें प्रभावित हो रही हैं। भारत दुनिया में तिलहन के सबसे बड़े उत्पादक देशों में से एक है और देश की कृषि अर्थव्यवस्था में इसका एक महत्वपूर्ण स्थान है। कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से जारी दूसरे एडवांस अनुमान के मुताबिक साल 2021-22 में 9 तिलहनों का कुल उत्पादन 3.714 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

दाम पर लगाम लगाने की तैयारी
उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित रखने के लिए खाद्य तेल की कीमतों पर लगातार नजर रखने के लिए उचित इंतजाम किए गए हैं। खाद्य सचिव की अगुवाई में अंतर-मंत्रालयीय कमेटी इसपर किसानों, उद्योग और उपभोक्ताओं के नजरिए से कीमतों और उपलब्धता पर नजरदीकी नजर रख रही है। यह कमेटी तेल की कीमतों की परिस्थितियों को लेकर साप्ताहिक आधार पर इसकी और दूसरे खाद्य पदार्थों की समीक्षा करती है। इसके तहत घरेलू उत्पादन, मांग, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर नजर रखा जाता है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत इसकी जमाखोरी और मुनाफाखोरी रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से स्पेशल टीमें गठित की गई हैं। ये औचक निरीक्षण करके बेईमानों केखिलाफ कार्रवाई करना जारी रखेंगे।












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