किसान महापंचायत ने भी आंदोलन लिया वापस; कहा- हर चरण का विश्लेषण करने के बाद ही करेंगे आंदोलन का समर्थन
गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान भड़की हिंसा के मद्देनजर कई किसान संघठनों ने किसान विरोध प्रदर्शन से अपना नाम वापस ले लिया है।
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान भड़की हिंसा के मद्देनजर कई किसान संघठनों ने किसान विरोध प्रदर्शन से अपना नाम वापस ले लिया है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु), ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन समिति के आंदोलन खत्म करने के बाद अब किसान महापंचायत ने भी आंदोलन स्थल को खाली करने का निर्णय लिया है।
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किसान महापंचायत के रामपाल जाट ने कहा कि, "हमने 21 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा से खुद को अलग कर लिया था लेकिन विरोध का समर्थन कर रहे थे। अब, हम हर चरण का विश्लेषण करने के बाद आंदोलन का समर्थन करेंगे। हमने शाहजहांपुर (राजस्थान-हरियाणा सीमा) पर विरोध स्थल खाली करने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि 26 जनवरी को लाल किले की घटना की जिम्मेदारी लेने वाले को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
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यह दर्शाता है कि यह सरकार की साजिश है। मामले की जांच होनी चाहिए।" वहीं दिल्ली में गणतंत्र दिवस वाले दिन ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा को लेकर 44 किसान नेताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने लुक आउट सर्कुलर जारी किया है। पुलिस ने कुल 33 केस दर्ज किए हैं, इनमें से लाल किला, आईटीओ और अक्षरधाम के पास हुई हिंसा के केस की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
गौरतलब है गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली प्रस्तावित थी। किसानों ने दिल्ली सरकार से कहा था कि वे शांतिपूर्वक इस रैली का आयोजन करेंगे और किसी प्रकार की हिंसा को अंजाम नहीं देंगे। लेकिन किसानों ने अपने वादे से इतर दिल्ली में हिंसा की और पुलिसकर्मियों के साथ भी हिंसक झड़पें की, जिसमें दिल्ली पुलिस के कई जवानों को गंभीर चोटें आईं। अब सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।












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